Marshal Arjan Singh का इस शहर से है खास नाता, पाक से जंग में ऐसे की मदद

deepak deewan

Publish: Sep, 17 2017 10:50:03 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
Marshal Arjan Singh का इस शहर से है खास नाता, पाक से जंग में ऐसे की मदद

जबलपुर में स्थित हैं चार आयुध निर्माणियां, देश की तीनों सेनाओं के लिए किया जाता है बम, तोप और वाहनों का उत्पादन

जबलपुर। वायुसेना के इकलौते मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार रात निधन हो गया। एयर चीफ अर्जन सिंह ने 1965 में पाकिस्तान से हुई जंग में अहम भूमिका निभाई थी और आदेश मिलने के सिर्फ 26 मिनट बाद उन्होंने पाक पर हमला बोल दिया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने अफसोस जताते हुए यह कहा था कि उस वक्त हम बहुत मजबूत स्थिति में थे लेकिन जंग जल्द खत्म हो गई। यदि कुछ दिन और जंग चलती तो हम पाक को मिटा देते।' पाक के दांत खट्टे करने की उनकी उपलब्धि और उसे नेस्तनाबूद कर देने की उनकी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए जबलपुर का नाम हमेशा याद आएगा। दुश्मनों से देश की सुरक्षा का दायित्व यहां की आर्डिनेंस फैक्ट्रियां बखूबी संभाल रहीं हैं।


बनते हैं बम, तोप और वाहन
जबलपुर में एक-दो नहीं बल्कि चार आयुध निर्माणियां स्थित हैं। इन चारों आयुध निर्माणियों में देश की तीनों सेनाओं के लिए बम, तोप और वाहनों का उत्पादन किया जाता है। वित्तीय वर्ष २०१७-१८ के लिए पांच हजार करोड़ से ज्यादा का उत्पादन लक्ष्य आयुध निर्माणी बोर्ड द्वारा दिया गया है। चारों निर्माणियों में अब तक ५० फीसदी उत्पादन पूरा हो गया है। यह भी एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इन आयुध निर्माणियों को कच्चे माल की समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सभी आयुध निर्माणियों के लिए कच्चे माल की समय पर अनुपलब्धता सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। वीकल फैक्ट्री और ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में परेशानी ज्यादा है।


कहां क्या बनता है
व्हीकल फैक्ट्री के नाम से जानी जाती वीएफजे में सेना के लिए उपयोगी वाहन बनाए जाते हैं। वीएफजे में स्टालियन, वाटर बाउजर, एलपीटीए और सुरंगरोधी वाहनों का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह जीआईएफ में १२० किग्रा एरिबल बम बॉडी, हैंड ग्रेनेड की बॉडी की ढलाई का काम किया जाता है। आर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया-ओएफके देश की सबसे बड़ी आयुध निर्माणियों में से एक है। ओएफके में ८४ एमएम बम, थाउजेंड पाउंडर बम, १२५ एमएम बम, कारतूस आदि बनाए जाते हैं। इधर गन कैरिज फैक्ट्री- जीसीएफ में लाइट फील्ड गन, मोर्टार, टी-९० टैंक की बैरल माउंटिंग के साथ स्वदेशी बोफोर्स तोप धनुष तोप का निर्माण किया जा रहा है।


इन्हें होती है सप्लाई- वायुसेना, थलसेना, नौसेना और केंद्रीय सुरक्षा बल


ये हैं नए प्रोजेक्ट
थाउजेंड पाउंडर बम बॉडी, २३ एमएम सिलका एमुनेशन, एल ७० गन डबल बैरल


इतना है उत्पादन लक्ष्य
- आर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया- २३०० करोड़ रुपए
- व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर- १९०० करोड़ रुपए
- गन कैरिज फैक्ट्री- ७०० करोड़ रुपए
- ग्रे आयरन फाउंडरी- १८० करोड़ रुपएए१८मएम सिलका एमुनेशन

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