खुलासा-संरक्षित जनजाति समुदायों के लोगों को लगा ये रोग, आप भी जानें

राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के कुलपति ने बताया, बोले परियोजनाएं शुरू होनी चाहिए

जबलपुर। शहरी चमक-दमक से दूर और प्राकृतिक वातावरण में रहने वाली जनजातिय समुदायों के लोग भी अब दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह चौकाने वाला खुलासा राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के  एक शोध में सामने आया है। शोध में बताया गया है कि जनजाति समुदायों के लोगों में यह उभरती हुई नई समस्या है। इसके लिए सरकार व निजी प्रयासों से जनजाति वाले क्षेत्रों में सहयोगकारी परियोजनाएं चलाने की आवश्यकता है। बुधवार को राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) का 34 वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। जिसे संबोधित करते हुए मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. आरएस शर्मा ने यह चिंता जाहिर की है। 

डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय संस्थान में जो रिसर्च से बीमारियों के आधुनिक उपचार के तरीके मिल रहे हैं। बदलते दौर में बीमारियों का स्वरूप भी बदल रहा है। एेसी स्थिति में रिसर्च की बड़ी भूमिका है। डीन डॉ. रूपलेखा चौहान ने कहा कि संस्थान के रिसर्च और चिकित्सा के क्षेत्र के कार्यों के कारण नेताजी सुभाष चन्द बोस मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज करने में मदद मिल रही है। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एचएस वर्मा ने कहा कि प्लेटलेट रिच प्लाज्मा के जरिए घांव भरने का सफल प्रयोग किया गया है। इस मौके पर निदेशक डॉ. नीरू सिंह, डॉ. जी राव मौजूद थे। 
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Lali Kosta
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