ऐसे खर्च किया जाता है सरकारी धन

प्रोजेक्ट से सम्बंधित अन्य आवश्यक जरूरतों को नजर अंदाज कर एक ही जरूरत के लिए खर्च किए करोड़ों रुपए, आइटीएमएस में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग सुविधा नहीं, शहर की सुरक्षा में नहीं उपयोगी

By: Sanjay Umrey

Published: 21 May 2019, 07:19 PM IST

जबलपुर। किसी प्रोजेक्ट में सरकारी धन को कैसे खर्च किया जाता है। सम्बंधित अन्य जरूरतों को नजरअंदाज कर किसी एक ही उपयोग में भारी भरकम राशि अंधाधुंध खर्च किस तरह कर दी जाती है। इसकी एक बानगी जबलपुर शहर में सामने आई है। यहां करीब 27 करोड़ रुपए की इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) योजना के अंतर्गत कई चौराहों पर कैमरे लगाए गए। इतनी बड़ी राशि से लगे कैमरे सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही लगा दिए गए। जबकि शहर की एक अन्य और महत्वपूर्ण जरूरत सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया। सुरक्षा के लिहाज से योजना क्रियांवयन के दौरान विचार ही नहीं किया गया। जगह-जगह लगाए गए इन कैमरों की रिकॉडिंग व्यवस्था की ही नहीं गई। नतीजा कहीं कोई वारदात हो जाए और चौराहों-तिराहों के वीडियो फुटेज की जरूरत आन पड़े तो इन कैमरों से कोई मदद नहीं मिल सकती। हालांकि अब जाकर उक्त योजना में सुरक्षा के लिहाज से भी कार्य की तैयारी की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि शहर में 27 करोड़ रुपए की इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) योजना के अंतर्गत कैमरे लगाए गए है। इनमें रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं है। इससे किसी भी चौराहे पर दो-चार घंटे पहले की रिकॉर्डिंग तक नहीं मिल सकती है। अभी शहर में आइटीएमएस कैमरे ट्रैफिक को ध्यान में रखकर लगाए गए हैं। इसमें सुरक्षा के पहलू को नजरअंदाज किया गया है। पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की बैठक में ये मुद्दा उठाए जाने के बाद अब कैमरों की रिकॉर्डिंग की व्यवस्था बनायी जा रही है। जिसमें एक महीने तक का डाटा सुरक्षित रहेगा।
शहर के 20 चौराहों पर आइटीएमएस के अंतर्गत कैमरे, पीए सिस्टम, एलइडी लगाए जाने हैं। अभी छह चौराहे पर ये व्यवस्था है। पिछले दिनों एसपी और निगम कमिश्नर की संयुक्त बैठक में ये मुद्दा उठा। जिसमें कैमरों को शहर सुरक्षा में भी उपयोगी बनाए जाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। एक चौराहे पर आइटीएमएस लगाने में लगभग 20 लाख खर्च किए गए हैं।
ट्रैफिक के लिए भी इन खामियों पर रखी बात-
शहर की मुख्य सडक़ों पर ट्रैफिक के लिहाज से भी कई तरह के संकेत और पट्टी नहीं बनायी गई है। कई चौराहों पर स्टॉप, जेब्रा क्रासिंग और वाहन पार्किंग के लिए सफेद पट्टी नहीं लगी है। ऑटो के लिए स्टैंड भी व्यवस्थित नहीं बनाए गए।
ये सुविधा भी जोड़ी जा रही-
चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तोडऩा भारी पड़ेगा। तीन बार ऐसा करने पर ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त हो जाएगा। यह व्यवस्था शुरू करने के लिए आइटीएमएस के सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है। कैमरों की मदद से ऑटोमेटिक वाहनों का डाटा सॉफ्टेवयर में स्टोर होता जाएगा। इसके लिए चौराहों पर आरएलवीडी (रेड लाइट वायरलेस डिवाइस) भी लगाई जाएगी, जो रेड लाइट जम्प करने वाले वाहनों का ब्यौरा कंट्रोल रूम को प्रेषित कर देगा।
यहां लग चुके-
तीन पत्ती, ब्लूम चौक, दमोहनाका, बल्देवबाग, गोहलपुर, रद्दी चौकी
यहां लगेंगे-
लेबर चौक, कटंगा, कलेक्टे्रट, बंदरिया तिराहा, तैय्यब अली पेट्रोल पम्प
यहां लगाए जा रहे ओवरस्पीड कैमरे-
शहर के प्रवेश प्वाइंट, पाटन, कटंगी, अंधमूक, धनवंतरि नगर, महाराजपुर, गौर, तिलवारा और डुमना रोड।
शहर में कुल 20 स्थानों पर लगेंगे
अब तक 14 चौराहों पर तीव्र रेज्युलेशन वाले कैमरे लगाए जा चुके
चंडालभाटा स्थित स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से निगरानी
ट्रैफिक के लिए ये हो रही कवायद-
- ट्रैफिक नियम तोडऩे वालों पर अभी कार्रवाई हो रही।
- आम लोगों को सूचना देने के लिए चौराहों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा है।
- जाम की स्थिति में लोगों को अलर्ट किया जा सकता है।
- एएनपीआर कैमरे स्वत: नम्बर प्लेट रीड कर लेते हैं।
- तेज रफ्तार वाहनों को चिह्नित करने के लिए एसवाइडीएस कैमरे लगाए जाएंगे।
- आरएलवाइडी कैमरे से रेड लाइट जम्प करने वालों को चिह्नित किया जाएगा।
आगे इस तरह के दिए गए निर्देश-
- चौराहों पर लगे कैमरों को सुरक्षा के लिहाज से भी उपयोगी बनाया जाए।
- चोरी होने वाले वाहनों का ब्यौरा आइटीएमएस के साफ्टवेयर से लिंक किया जाए।
- चोरी के वाहन किसी चौराहे से गुजरते ही वह बीप की आवाज से अलर्ट कर देगा।
- कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम सप्ताह भर तक स्टोर रखेंगे।
- ऑटो की रूट व कलर कोटिंग के साथ यूनिक नम्बर के आधार पर नजर रखी जाएगी
- फेस डिटेक्टिव कैमरे भी लगाने की तैयारी है, जिससे अपराधी किसी चौराहे से निकलें तो पता चल जाए।
- चोरी के वाहनों के लिए 360 डिग्री में घूमने वाले डोम कैमरा राइट टाउन स्टेडियम के पास लगाए गए हैं।

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