नियमों के खिलाफ या दुर्भावनावश हो तबादला तो ही कर सकते हैं हस्तक्षेप

हाईकोर्ट ने अहम आदेश में क हा, शिक्षक की याचिका निरस्त

By: prashant gadgil

Updated: 04 Apr 2019, 08:31 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग व उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित दो अहम आदेश दिए हैं। मप्र हाईकोर्ट ने पहले आदेश में कहा कि कौन से सरकारी कर्मी को कहां तैनात करना है, यह सक्षम अधिकारी के निर्णय पर निर्भर है। सरकारी कर्मी का तबादला यदि दुर्भावनावश या वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किया जाए, केवल तभी कोर्ट इसमें हस्तक्षेप कर सकती है। इस मत के साथ जस्टिस नंदिता दुबे की सिंगल बेंच ने छिंदवाड़ा जिले में कार्यरत शिक्षिका की याचिका निरस्त कर दी।
यह है मामला
छिंदवाड़ा जिले के जड़बिजोरी तामिया कन्या आश्रम स्कूल में उच्च श्रेणी शिक्षक रश्मि रानी तंतुवाय ने याचिका दायर कर कहा कि उसका तबादला 31 जनवरी 2019 को गल्र्स मिडिल स्कूल बाम्हनवाड़ा कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की। जिसके साथ कन्या आश्रम की प्रधानाध्यापिका का पत्र भी पेश किया। इस पत्र में कहा गया कि स्कूल में केवल दो शिक्षक ही हैं। जबकि कम से कम तीन होने चाहिए। एक और शिक्षक का तबादला कर देने से महज एक ही शिक्षक बचेगा। जिससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसका निराकरण करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उच्चाधिकारियों को अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अभ्यावेदन का निराकरण होने तक याचिकाकर्ता अपनी जगह पर काम करते रहेगी।
हो चुकी हैं रिलीव
अधिवक्ता मनोज चंसोरिया ने तर्क दिया कि इसके बावजूद 12 मार्च 2019 को याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ तंतुवाय ने यह दूसरी याचिका दायर की। शासकीय अधिवक्ता अभय पांडे ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता बाम्हनवाड़ा से रिलीव हो चुकी हैं। इसके अलावा उनकी जगह दूसरे शिक्षक को तैनात कर दिया गया। उन्होंने स्थानांतरण को शासकीय मसला बताया। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट न याचिका खारिज कर दी।

रिटायरमेंट के चार साल बाद प्रोफेसर से वसूली पर रोक
एक दूसरे मामले में मप्र हाईकोर्ट ने रिटायर्ड प्रोफेसर से सेवानिवृत्ति के चार साल बाद की जा रही वसूली पर रोक लगा दी। जस्टिस नंदिता दुबे की सिंगल बेंच ने उच्च शिक्षा विभाग प्रमुख सचिव, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के वित्त नियंत्रक एवं महात्मा गांधी कॉलेज करेली के प्राचार्य को नोटिस जारी किया। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया। करेली निवासी डॉ. बीपी गुप्ता ने याचिका में कहा कि वे महात्मा गांधी कॉलेज करेली से प्रोफेसर के पद से 31 जुलाई 2014 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के पूर्व प्राचार्य ने प्रमाण-पत्र जारी किया था कि उन पर किसी भी प्रकार का बकाया नहीं है। चार साल बाद 14 नवंबर 2018 को प्राचार्य ने उनके खिलाफ 34 हजार 841 रुपए की वसूली निकाल दी। अधिवक्ता प्रभात असाटी ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति के चार साल बाद वसूली का आदेश तर्कसंगत नहीं है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता से रिकवरी पर रोक लगा दी।

 

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