नवजात ‘दिव्या’ को देख भावुक हो गए आईपीएस सिद्धार्थ, भर आईं आंखें- देखें वीडियो

नवजात ‘दिव्या’ को देख भावुक हो गए आईपीएस सिद्धार्थ, भर आईं आंखें- देखें वीडियो

By: Lalit kostha

Published: 03 Jul 2021, 09:17 AM IST

जबलपुर। नवजात बच्ची के माता-पिता को तो उस पर तनिक भी दया नहीं आई। तभी तो उसे सुनसान इलाके में लावरिस फेंक दिया था। कचरे के ढेर पर रोती-बिलखती बच्ची पर कुछ युवकों की नजर पड़ी और वह शहर के एल्गिन अस्पताल तक पहुंच गई। एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को बच्ची के बारे में जानकारी मिली तो वे भी अस्पताल पहुंच गए। बच्ची को गोद में लेकर इतना दुलारा कि वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। एसपी ने बच्ची के चेहरे की चमक देखकर उसका नामकरण भी ‘दिव्या’ के रूप में किया। अस्पताल का स्टाफ भी बच्ची की देखभाल आत्मीयता के साथ कर रहा है। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ इस कोशिश में रहता है कि बच्ची को कोई तकलीफ न हो।

माता-पिता जिस नवजात बच्ची को लावारिस छोड़ गए
उसे एसपी ने दुलारा तो देखने वाले हुए भावुक, ‘दिव्या’ नाम रखा
अस्पताल पहुंचकर देखभाल कर रहे स्टाफ की सराहना की
बच्ची के लिए झूला और खिलौने भेंट किए

 

गुरुवार को यह बच्ची तालाब के किनारे कचरे में बिलख रही थी। स्थानीय लोगों ने उसे उठाया और अधारताल पुलिस को सूचना दी। डायल-100 से बच्ची को एल्गिन अस्पताल ले जाया गया। पुलिस भी बच्ची के परिजन की तलाश कर रही है। हालांकि, अभी तक कुछ पता नहीं चला। पुलिस का कहना है कि आस-पास के लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन कहीं से ऐसा सुराग नहीं मिला कि बच्ची के परिजन तक पहुंचा जा सके। अस्पताल पहुंचे एसपी ने वहां के स्टाफ से कहा है कि बच्ची को लेकर किसी भी तरह की जरूरत हो, तो उन्हें बताएं। सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। अभी बच्ची अस्पताल में ही रहेगी।

नन्हीं परी के लिए गुब्बारों से सजाया वार्ड
एल्गिन अस्पताल का माहौल शुक्रवार को अलग था। अस्पताल के बच्चा वार्ड को गुब्बारों से सजाया गया था। स्टाफ के चेहरे पर भीड़भाड़ के दबाव वाली झुंझलाहट नहीं थी। क्योंकि, उन्हें बताया गया था कि अधारताल तालाब के पास लावारिस में मिली लगभग आठ से दस दिन की बच्ची का आज नामकरण होना है। एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा एल्गिन अस्पताल पहुंचे। उसे दुलार दिया। उसके चेहरे की चमक (दिव्यता) देखकर ‘दिव्या’ नाम दिया। बच्ची का नामकरण होते ही अस्पताल परिसर तालियों की गडगड़़ाहट से गूंज उठा। एसपी बहुगुणा बच्ची के लिए झूला, कपड़े और खिलौने भी ले गए थे। मासूम को गोद में लेकर झूले में लिटाया। काफी देर तक उसे झूला झुलाते रहे।

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Lalit kostha Desk
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