भोपाल में यह लैब बनने में छह साल लगे, जबलपुर में तो 21 दिन में तैयार हो गई

एम्स की अनुमति के बाद जबलपुर में कोविड-19 नमूनों की जांच शुरू

 

By: shyam bihari

Updated: 10 May 2020, 09:36 PM IST

जबलपुर। भोपाल मेडिकल कॉलेज में जिस वॉयरोलॉजी लैब को बनने में करीब छह साल का समय लग गया, जबलपुर शहर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में वह लैब महज 21 दिन में तैयार कर ली गई। इसमें शनिवार से परीक्षण भी शुरू कर दिए गए। नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की अनुमति हासिल करने के साथ ही लैब में पहले दिन करीब 40 संदिग्धों के नमूने कोविड-19 जांच के लिए आए। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टर और टेक्नीशियन पूरे दिन नमूनों की जांच में जुटे रहे। हालांकि, देर रात तक नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।

शहर में अभी तक कोविड-19 के टेस्ट सिर्फ एनआईआरटीएच में किए जा रहे थे। यहां आसपास के करीब 15 जिलों के संदिग्धों के नमूने भी जांच के लिए भेजे जा रहे थे। एकमात्र सेंटर होने से नमूनों की जांच रिपोर्ट विलंब से मिल रही थी। सागर और ग्वालियर तक नमूने जांच के लिए भेजने पड़ रहे थे। मेडिकल में नई लैब की शुरुआत से शहर में कोरोना टेस्ट के लिए दो लैब हो गई है। इससे नमूनों की जांच अब ज्यादा संख्या में हो सकेगी। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पीके कसार के अनुसार लॉकडाउन जैसी विषम परिस्थितियों में प्रदेश के बाहर से उपकरण एवं अन्य सामग्रियों की आपूर्ति कराना काफी कठिन कार्य था। अधिकारियों एवं स्टाफ के सहयोग से 21 दिन में लैब स्थापित करके जांच की सुविधा शुरूकर दी गई। माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग एनआईआरटीएच-आइसीएमआर से कराई गई।

shyam bihari Desk
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