scriptjabalpur,Anganwadi centers,Women and Child Development | एक हजार लोगों ने लिया आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद | Patrika News

एक हजार लोगों ने लिया आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद

जिले की आंगनबाडिय़ों का स्वरूप बदल रहा है। सरकारी सहायता के अलावा अब निजी भागीदारी से इन्हें संवारा जा रहा है। एडाप्ट एन आंगनबाड़ी केंद्र योजना के तहत अब तक जिले की करीब एक हजार आंगनबाडिय़ों को गोद लिया जा चुका है। इन्हें गोद लेने वालों में ज्यादा अधिकारी और संस्थाओं के अलावा आम व्यक्ति भी शामिल हैं। वे एक साल तक इन केंद्रों की देखभाल अपने स्तर पर करेंगे। अलग-अलग प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएंगे।

जबलपुर

Published: January 23, 2022 11:54:18 am

जबलपुर. यह योजना इसी माह प्रारम्भ हुई है, लेकिन इसमें भागीदारी करने वालों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। जो भी व्यक्ति या संस्था किसी केंद्र को गोद लेते हैं तो उस केंद्र की जिम्मेदारी शासन के अलावा उनकी होगी। गोद लेने वाले लोगों में कोई केंद्रों में बच्चों के लिए रंग-बिरंगी कुर्सियां दान दे रहा है तो कोई दीवारों को आकर्षक बनवा रहा है। इसी प्रकार कई लोग शौचालय बनवा रहे हैं। भवन की मरम्मत और वहां हवा-पानी का इंतजाम सहित अन्य कार्य कर रहे हैं।

Adopt an Anganwadi Center
More than one thousand people have adopted Anganwadis in the district, now they will take care of them.

24 सौ से ज्यादा हैं केंद्र जिले में
जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 2 हजार 483 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इनमें लगभग एक लाख 48 हजार बच्चे पंजीबद्ध हैं। कई ऐसे केंद्र हैं जिन्हें आदर्श आंगनबाड़ी के रूप में विकसित किया गया है। कुछ केंद्र शासकीय भवन तो ज्यादातर निजी भवनों में चल रहे हैं।

विधायक और अधिकारी भी शामिल
करीब एक हजार लोगों ने अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया है। इनमें कलेक्टर के अलावा, एसडीएम, तहसीलदार, शासकीय विभागों के प्रमुखों के अलावा अन्य अधिकारी शामिल हैं। विधायकों में नंदिनी मरावी ने एक केंद्र को लिया है। जनप्रतिनिधि, बड़े व्यापारी, उद्योगपति भी इस दिशा में कदम उठा रहे हैं। अब विभाग अन्य लोगों से भी सम्पर्क में जुटा है ताकि वे भी इन केंद्रों के विकास में अपनी भागीदारी कर सकें।

एडाप्ट एन आंगनबाड़ी केंद्र योजना के तहत अब तक एक हजार से ज्यादा केंद्रों को गोद लिया जा चुका है। हम प्रयास कर रहे हैं कि लगभग सभी केंद्रों को इस योजना का लाभ मिले। इसके लिए लोगों से सम्पर्क किया जा रहा है।

-एमएल मेहरा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास

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