नर्मदा की कोख में यह है बड़ी खासियत

नर्मदा की कोख में यह है बड़ी खासियत
ladies jumped in narmada river

Abhimanyu Chaudhary | Updated: 12 Oct 2019, 10:15:34 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

जबलपुर में है कला की समृद्ध विरासत

जबलपुर, संस्कृति विभाग से जुडे लोग और कलाकार ही नहीं बल्कि संस्कृति के प्रति जिनका भी अनुराग है, वे बेबाकी से यह मानते हैं कि जबलपुर वो भूमि है, जहां नैसर्गिक रूप से कलाकार पैदा होते हैं। हालांकि प्रशिक्षण के उतने अवसर नहीं दिए जा सके। फिर भी नृत्य, नाटक, ललित कलाएं, फिल्म या फिल्म संगीत का क्षेत्र में देश में सबसे ज्यादा प्रतिभावान और उज्जवल काम करने वाले जबलपुर के ही कलाकार निकले। मप्र संस्कृति परिषद के उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी भोपाल के उपनिदेशक राहुल रस्तोगी ने शनिवार को रानी दुर्गावती संग्रहालय में आयोजित मप्र राज्य रूपंकर पुरस्कार एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर पत्रिका से साक्षात्कार में ये बातें कहीं।


उप निदेशक राहुल रस्तोगी ने कहा, वैचारिक और दर्शन में ये बात साबित होती है। ओशो जैसे दार्शनिक यहीं पैदा हुए। संस्कृति का खाका भूगोल से तय होता है और भूगोल को बनाने में प्रकृति की भूमिका होती है। नदियों के किनारे सभ्यता और संस्कृतियों का विकास हुआ है। मां नर्मदा की कोख में नैसर्गिक रूप से कलाकार पैदा होते हैं। मां नर्मदा के आशीर्वाद से यहां कलाकार, रसिक और कला जिज्ञासुओं की समृद्ध विरासत है। समकालीन और नागर कलाओं के अलावा पारम्परिक कलाओं पुष्पित पल्वित होती है। जरूरत है सिर्फ कला प्रतिभा को सही दिशा देने की। खजुराहो की तरह जबलपुर में शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति होने से उभरते कलाकारों को बहुत कुछ नया सीखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। संस्कृ ति के प्रति स्थानिक चेतना आवश्यक है। जबलपुर में संस्कृति का प्रवाह है। छोटा खजुराहो समारोह यहां विश्व पर्यटन के नक्शे पर खजुराहो एक बड़ा केंद्र है। ४६ वर्षों से खजुराहो नृत्य समारोह किया जा रहा है। देश का यह सबसे बड़ा शास्त्रीय नृत्य का कार्यक्रम है। कह सकते हैं कि जबलपुर में छोटे खजुराहो नृत्य समारोह को किया जा रहा है। कला के सभी आयामों के प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आगामी योजनाओं के माध्यम से युवा कलाकारों और अवसर प्राप्त होने की संभावना है।

डेढ़ दशक पहले हुआ था गोंडवाना उत्सव
जबलपुर में डेढ़ दशक पहले गोंडवाना उत्सव हुआ था। उसके बाद अब यह उत्सव किया जा रहा है। घुंघरू नामक नृत्य कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य भरत नाट्यम, ओडिसी की प्रस्तुति की जा रही है।

भरत नाट्यम की युगल प्रस्तुति

शहीद स्मारक गोल बाजार में शाम ७ बजे शास्त्रीय नृत्यों की मनमोहक प्रस्तृतियां हुई। भोपाल की अल्पना बाजपेयी ने कथक त्रयी और भोपाल की आरोही मुंशी एवं रिया झां ने भरत नाट्यम युगल प्रस्तुति दी। इस मौके पर काफी संख्या में उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रदर्शनी में बोल रही हैं कला कृतियां नगर निगम आयुक्त आशीष कुमार ने शनिवार शाम रानी दुर्गावती संग्रहालय में आयोजित मप्र राज्य रूपंकर पुरस्कार एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कला की विभिन्न विधाओं की चयनित ६८ कला कृतियां प्रदर्शनी में लगाई गई है।

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