BIG NEWS: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूलों पर लगाम, नहीं वसूल पाएंगे मनमानी फीस

BIG NEWS: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूलों पर लगाम, नहीं वसूल पाएंगे मनमानी फीस

Lalit Kumar Kosta | Publish: Apr, 17 2018 02:12:09 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

ब्रेकिंग न्यूज: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूलों पर लगाम, नहीं वसूल पाएंगे मनमानी फीस

 

जबलपुर। हर नए शिक्षण सत्र में प्रदेश समेत पूरे देश में एक ही मुद्दा गर्माया रहता है, बच्चों की एडमिशन फीस और स्कूलों की मनमानी का। हर साल जांच कमेटियां बनती हैं, जांच होती है और जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक सभी बच्चों की पढ़ाई शुरू होकर आधी हो चुकी होती है। नतीजतन स्कूल अपनी मनमानी कर अच्छी खासी मोटी रकम कमा चुके होते हैं, अभिभावक चाहकर भी सिस्टम का कुछ नहीं कर पाते। फिर अगले साल के लिए बात टाल दी जाती है। इसी बात को लेकर मप्र हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। जिसमें स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए एक अहम फैसला दिया, जिसे सुनकर अभिभावक खुश हो गए हैं। ऐसे में स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लग जाने की संभावना है।

about- जनहित याचिका का निराकरण, निजी स्कूल 10 फीसदी से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकते

यह है मामला
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि से सम्बन्धित बनाए गए अधिनियम के खिलाफ चुनौती देने वाली जनहित याचिका निराकृत कर दी है। याचिका में सरकार ने बताया कि निजी स्कूल 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि नहीं कर सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो उन्हें कलेक्टर के समक्ष बीते तीन साल का विवरण पेश करना होगा। याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया था। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई थी, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनवरी में मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस अधिनियम को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि अधिनियम तो बनाए गए हैं, परंतु इन्हें क्रियान्वित करने नियम नहीं बनाए गए। अधिनियम इस वर्ष के शैक्षणिक सत्र में लागू किया जा रहा लेकिन फीस वृद्धि 10 प्रतिशत से नीचे रखने के लिए प्रतिबंध का नोटिफिकेशन जारी ही नहीं किया गया है। ऐसे में निजी स्कूलों में वसूली जा रही फीस को मॉनीटर करने का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय हाजिर हुए।

ऐसे होती है वसूली
कॉपी किताबों में कमीशनखोरी
स्कूल ड्रेस को बताई हुई दुकान से खरीदने का आदेश
प्रवेश के नाम पर डोनेशन और मोटी ट्यूशन फीस

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