ब्रांडिंग से सिर्फ तस्वीरें चमकीं, गलियां-नालियां तो बजबजाती ही रहीं

730 दिन में महज आठ पायदान आगे बढ़ा जबलपुर, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में निरंतरता की कमी

 

By: shyam bihari

Published: 21 Aug 2020, 09:53 PM IST

जबलपुर। 'नम्बर-1 जबलपुर अभियान चार साल से चलाया जा रहा है। लेकिन, जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने से ज्यादा ध्यान ब्रांडिंग पर दिया गया। नतीजतन स्वच्छता में पहला पायदान हासिल करना, तो दूर की बात शहर टॉप-10 में भी जगह नहीं बना सका। खुश होने की छोटी सी बात यह है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 की प्रतियोगिता में 10 लाख से 40 लाख की आबादी वाले शहरों में जबलपुर को बेस्ट सिटी इन सिटीजन फ ीडबैक का अवॉर्ड मिला है। कमाल तो सिहोरा ने किया है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के तहत एक लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में सिटीजन लेड इनोवेशन कैटेगरी में ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग के लिए उसे राष्ट्रीयस्तर का पुरस्कार मिला है।

यह है स्थिति
-17 वीं रैंक पर है जबलपुर
-25वीं रैंक थी पिछले दो साल से
-17वीं रैंक मिली थी पहली बार

इंदौर-भोपाल से नहीं लिया सबक
इंदौर और भोपाल की सफाई व्यवस्था से जबलपुर नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था आए दिन ठप हो जाती है। निगम प्रशासन सर्वेक्षण के समय ही फील्ड पर सक्रिय होता है। नतीजतन दो साल यानी 730 दिनों में निगम केवल 8 पायदान ही आगे बढ़ सका और 17 वीं रैंक से संतोष करना पड़ रहा है। रैंकिं ग में पिछडऩे का एक बड़ा कारण स्टार रेटिंग में एक अंक भी न मिलना रहा और इसकी मुख्य वजह सफाई में निरंतरता की कमी व नाले-नालियों का खुला होना बताया जा रहा है। शहर में कचरा संग्रहण के लिए डोर टू डोर की व्यवस्था लागू है। इसके बावजूद आए दिन ये व्यवस्था ठप हो जाती है। सफाई ठेकेदार पर कार्रवाई की बात तो कही जाती है, लेकिन कुछ नहीं होता। गली, मोहल्ले, सड़क, चौराहे, मुख्य बाजार, अस्पतालों के आसपास अक्सर कचरे का ढेर लग जाता है। निगम सफाई को लेकर कितने ही दावे करें अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है की सार्वजनिक स्थल में कचरे का ढेर न लगे। दीपावली, होली से लेकर सभी बड़े पर्वों के अवसर पर नगर की सफाई व्यवस्था ठप हो जाती है। हर साल निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कहते हैं व्यवस्था सुधारेंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता।

खुले वाहनों में कचरा परिवहन
स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर चार बार शामिल हो चुका है। निगम के अधिकारियों को स्पर्धा के सभी मापदंड मालूम हैं, इसके बावजूद कचरा परिवहन खुले वाहनों में किया जाता है। ये वाहन मार्ग में कचरा गिराते जाते हैं। रानीताल में हजारों टन कचरे का पहाड़ लगा है। इस पहाड़ को हटाने व स्थल को रमणीय स्थल के रूप में विकसित करने एक दशक से ज्यादा समय से प्लानिंग हो रही है। लेकिन आज तक कचरे का पहाड़ नहीं हटाया गया। इसी तरह से अब सिविक सेंटर में मलबा का पहाड़ खड़ा किया जा रहा है। बीच शहर में रानीताल, हनुमानताल, महानद्दा, गंगा सागर, सूरजताल, गोकलपुर तालाब सीवर टैंक में तब्दील हैं। इन तालाबों का मौजूदा स्वरूप शहर की तस्वीर भी बिगाड़ रहा है। कई तालाबों का पानी दुर्गंध मारता है।

इन प्रयासों से लेना होगा सबक
इंदौर कचरा कलेक्शन के एवज में लोगों को राशि का भुगतान करता है। सूरत ने कचरे का पहाड़ खत्म कर रमणीय स्थल विकसित कर दिया, सैकड़ों साल पुराने तालाब का पुनरुद्धार कर उसे आकर्षक स्वरूप दिया। अंबिकापुर सफाई से नगरवासियों को जोडऩे व उनकी आदत बदलने में सफल रहा। विजयवाड़ा और अहमदाबाद ग्रीन कचरे से खाद बना रहे हैं। चंडीगढ़ ने प्लास्टिक वेस्ट से आकर्षक डस्टबिन बना डाला। वे सालभर स्वच्छता में निरंतरता रखकर अच्छी रैंकिं ग हासिल करने में सफल रहे। जबलपुर नगर निगम आयुक्त अनूप कुमार सिंह का कहना है कि पिछले सालों के मुकाबले रैंकिं ग में सुधार हुआ है, लेकिन सफाई व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता है, इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे।

shyam bihari Desk
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