MP के इस बड़े शहर में सूदखोरों का कॉकस, मजबूर हो रहे प्रताड़ित

-कर्ज की रकम लौटाने के बाद भी जबरन वसूली
-अवसाद में आत्महत्या को प्रेरित हो रहे लोग

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 23 Aug 2020, 09:12 PM IST

जबलपुर. जबलपुर मध्य प्रदेश का बड़ा शहर है। यहां पश्चिम-मध्य रेलवे का मुख्यालय है। मंडल कार्यालय है। लेकिन इस शहर के मजबूर लोग बेबस हैं। वो लोग जो आर्थिक रूप से विपन्न हैं, अक्सर कर आपात स्थिति में उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझता तो ये सूदखरों के चंगुल में फंस जाते हैं। सूदखोरों का काकस इतना बड़ा और खतरनाक हो गया है कि लोगों के कर्ज की रकम चुकाने के बाद भी वसूली जारी रहती है। ऐसे में कई तो इतना अवसाद में आ गए कि आत्महत्या तक करने का मन बना लिया। कुछ ने तो इसका प्रयास भी किया। गनीमत कि समय रहते अन्य साथियों ने उन्हें बचा लिया। लेकिन स्थानीय प्रशासन इन सूदखरों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

बता दें कि जबलपुर रेल मंडल कार्यालय होने के कारण,जोन में 16 हजार रेल कर्मचारी कार्यरत हैं। अकेले जबलपुर में 5-7 हजार रेलकर्मी हैं। इनमें से सैंकड़ों रेलकर्मी ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं। ऐसे कर्मचारियों को अपने मोह माया में फंसाते हैं ये सूदखोर। ये सूदखोर डंके की चोट अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इसकी जानकारी सभी को है लेकिन उन पर हाथ डालने की हिमाकत कोई नहीं करता। ऐसे में वो रेल कर्मचारी इनकी गिरफ्त में लगातार आर रहे हैं और प्रताड़ित हो रहे हैं।

अब सूदखोरी से परेशान रेलवे के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपी है। शिकायती पत्र में उन्होंने रेलवे के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम का उल्लेख किया है जो सूदखोरी के धंधे से जुड़े हैं। शिकायतकर्ता ने इनके विरुद्ध सख्त कार्रवाकी की मांग की है। रेल कर्मचारी ने शिकायत करने के साथ ही सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। उसके अनुसार सूदखोर रुपये उधार देकर उनसे ब्याज पर ब्याज वसूल कर रहे हैं। रुपये नहीं देने पर गाली गलौज, मारपीट करते हैं और तो और जान से मारने की धमकी भी देते हैं। पीड़ित रेलवे कर्मचारियों ने ऐसी कई शिकायतें स्थानीय पुलिस के अलावा आरपीएफ में भी की हैं।

बताया जाता है कि शिकायतकर्ता सूदखोर त्रिलोक सिंह और अर्जुन गोंड से आर्थिक परेशानी के दौर में पांच साल पूर्व 15-15 हजार रुपये उधार लिए थे। उस समय दोनों सूदखोरों ने उससे ब्लैंक चेक ले लिए थे। रेलकर्मी ने सुविधानुसार दोनों सूदखोरों को मूल रकम ब्याज सहित लौटा दिया। लेकिन इसके बाद भी सूदखोर उस ब्लैंक चेक के मार्फत रेलकर्मी से 15 हजार के एवज में 1.50 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।

सूदखोरों की मॉडस आपरेंडी ऐसी है कि वो बड़ी आसानी से ऐसे कमजोर तबके के लोगों को अपने झांसे में फंसा लेते हैं। वो पहले ऐसे लोगों की मदद के नाम पर रुपये देते हैं और जितना बन सके लौटा देने की बात करते हैं। बाद में ब्याज के रूप में थोड़ी-थोड़ी रकम लेते हुए दिया हुआ पैसा तो वसूल ही लेते हैं फिर संबंधित को प्रताड़ित करने लगते हैं। इसके तहत वो ब्याज पर पैसे लेने वाले मजूबर से दोबारा मूलधन वापस लेने या उस पर ब्याज वसूलने के लिए धमकी देकर दबाव बनाते हैं।

रेलवे में ऐसे और भी कर्मचारी हैं जिन्होंने कर्ज लेने के बाद कई गुना रकम लौटाई इसके बाद भी सूदखोरों की वसूली नहीं रुक रही है। पिछले साल एक कर्मचारी सूदखोरों से परेशान होकर आत्महत्या करने ट्रेन के सामने कूद रहा था जिसे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने बचाया था। इस मामले में आरपीएफ में भी शिकायत हुई थी।

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