तीर्थंकर से कम नहीं हैं ये संत, दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं कष्ट, पीएम मोदी भी ले चुके आशीर्वाद- देखें वीडियो

Lalit Kumar Kosta | Publish: Mar, 26 2019 12:35:58 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

तीर्थंकर से कम नहीं हैं ये संत, दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं कष्ट, पीएम मोदी भी ले चुके आशीर्वाद- देखें वीडियो

जबलपुर। जैन धर्म में वैसे तो 24 तीर्थंकर भगवान पूजे जाते हैं। लेकिन एक संत ऐसा भी है जो किसी तीर्थंकर भगवान से तो कम नहीं है। ये हम नहीं कहते बल्कि उनकी ख्याति कुछ ऐसा ही बयां करती है। उनके दर्शन मात्र से ही कष्टों का क्षरण शुरू हो जाता है। इस संत की खासियत है कि उनके चेहरे पर सदैव मुस्कान बिखरी रहती है। साथ ही इनके मानने वाले केवल जैन सम्प्रदाय के लोग नहीं है, बल्कि हर जाति के लोग इनको उतना ही सम्मान व आदर देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी इनके दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। राजनीति से लेकर हर धर्म के धर्मगुरु भी इनका आदर सम्मान करते हैं। जीहां. हम बात कर रहे हैं मुनि श्रेष्ठ आचार्य विद्यासागर महाराज की। जो इन दिनों संस्कारधानी की धरा पर पधारे हुए हैं। उनके दर्शनों को लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

दयोदय तीर्थ में आचार्यश्री विद्यासागर के मंगल प्रवचन
राष्ट्र के लिए आवश्यक है अच्छे नागरिक बनना

सिर्फ डिग्री हासिल करने से शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण नहीं होता है। शिक्षा ऐसी हो जो युवाओं को स्वावलम्बी बनाए। साक्षर सभी बन रहे हैं, लेकिन राष्ट्र और समाज के लिए अच्छे नागरिक बनाने की आवश्यकता है। गांव और किसान स्मार्ट बनेंगे तो खुशहाली और समृद्धि का लक्ष्य पूर्ण होगा। भारत की आत्मा गांव ही है। उक्त उद्गार दयोदय तीर्थ तिलवाराघाट में सोमवार को आचार्यश्री विद्यासागर ने व्यक्त किए।

मंगल प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा, जीवन घड़ी के समान है। जिस तरह घड़ी सदैव आगे ही चलती है, कभी उल्टी नहीं चलती। उसी तरह गतिमान जीवन भी आगे ही चलता है। यदि घड़ी की गति कम या ज्यादा हो जाती है तो वो किसी काम की नहीं रहती। उसी तरह जीवन में यदि हम सद्कर्मों को छोडकऱ गलत कर्मों की ओर मुड़ जाते हैं तो जीवन व्यर्थ है। जिसने अंतिम सांस ली, उसका जीवन निसचेत हो जाता है। अभी हम सांस ले रहे हैं परंतु अगली सांस लेंगे या नहीं इसका कोई ठिकाना नहीं है। प्राण वायु तो है, लेकिन यदि उसे ग्रहण करने की क्षमता नहीं है तो वे किस काम की। इसी तरह ज्ञान, धर्म, सद्कार्य, अहिंसा सब जगह हैं, लेकिन यदि हम ये ग्रहण नहीं करते तो जीवन का अर्थ ही क्या है। आचार्यश्री का पाद प्रच्छालन नरसिंहपुर के आकाश जैन एवं रिंकू जैन ने किया। धर्म सभा का संचालन अमित पड़रिया ने किया।

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