कोरोना काल में पुलिस ने ‘ लठमार ’ छवि तोड़ी, जबलपुर पुलिस का सोशल चेहरा उभरा

कोरोना संक्रमण काल में पुलिस की भूमिका बदली तो लोगों ने दिया सम्मान

By: govind thakre

Published: 23 May 2020, 06:41 PM IST

जबलपुर. कोरोना संकट के समय पुलिस कर्मियों ने अपने आचरण व व्यवहार से मानवीय चेहरा पेश किया है। दो महीने से चल रहे लॉकडाउन में शहर की पुलिस ने अलग से छवि बनाई है। पुलिस फिलहाल मानवीय चेहरा प्रस्तुत करके ‘ल_ मार’ वाली इमेज से हद तक बाहर निकली है। वर्दी वाले कहीं भोजन पहुंचा रहे हैं, कहीं पैदल परदेस से लौटे मजदूरों के लिए भोजन और वाहन की व्यवस्था कर रहे हैं। नंगे पैरों में चप्पल पहनाने जैसा सराहनीय काम भी कर रहे हैं। गाने, नुक्कड़ नाटक और चित्रकारी के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया। कोरोना के संक्रमण और लॉकडाउन में ड्यूटी के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण ओमती थाने में पदस्थ आरक्षक आनंद पांडे ने पेश किया। पैदल ही कानपुर से वे दो अप्रैल को जबलपुर पहुंचे। अधारताल मिल्क स्कीम में ट्रैफिक थाने में पदस्थ सूबेदार अखिलेश कुशवाहा, आरक्षक सुरेंद्र अवस्थी, रवि कुमार ने लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक पेश किया। 30 मार्च को डायल-100 पर गोहलपुर के एक परिवार ने घर में राशन न होने की परेशानी सुनाई। पुलिस भोजन सामग्री लेकर पहुंच गई। ओमती थाने में पदस्थ एसआई सतीश झारिया ने गीत गाकर क्षेत्र के लोगों को लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का संदेश दिया। ड्यूटी करते हुए सीएसपी गढ़ा रोहित काशवानी, एसआई सतीश झारिया सहित पांच आरक्षक भी कोरोना से संक्रमित हुए, लेकिन पुलिस कर्मियों के हौसले कम नहीं हुए।
शुरुआती समय में कुछ ठीक नहीं था लॉकडाउन के पहले चरण में जरूर पुलिस ने सख्ती के चलते कुछ एक स्थानों पर डंडे बरसाए थे। पनागर में एक पत्रकार की बेवजह पिटाई की बात हो या फिर गोराबाजार में किसान की पिटाई का मामला हो। लेकिन, इन छिटपुट वारदातों को छोड़ दें तो अन्य कोई गम्भीर आरोप पुलिस पर अब तक नहीं लगे।
वर्जन-कोरोना संकट के समय पुलिस कर्मियों ने अपने आचरण व व्यवहार से मानवीय चेहरा पेश किया है। हमारे और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी समय-समय इसको लेकर चर्चा करते रहे हैं कि फरियादियों को कैसे सुनना है। चैकिंग में क्या करना है? लोगों की मदद कैसे करनी है? केस-एक
मदन महल पुलिस ने फोन पर मिली सूचना पर माढ़ोताल आईटीआई गली में फंसे मजदूरों के लिए 90 पैकेट पहुंचाया। विजय नगर व ग्वारीघाट में भोजन के पैकेट पहुंचाए। गल्र्स हॉस्टल की लड़कियों और गुलौआ चौक के पास रहने वाले एक परिवार को राशन पहुंचाया।
केस-दो
एसपी के पास नेपियर टाउन में हॉस्टल में रह रही पांच छात्राओं ने फोन किया कि उनका राशन समाप्त हो गया है। ओमती टीआई एसपीएस बघेल और कंट्रोल रूम प्रभारी राशन लेकर छात्राओं के पास पहुंचे। 15-15 किलो के भोजन सामग्री के पैकेट दिए।
केस-तीन
01 अप्रैल को सिविल लाइंस क्षेत्र में हॉस्टल में फंसी सिवनी की दो बहनों को पुलिस ने वाहन की व्यवस्था का घर पहुंचाया। एक का पैर फ्रैक्चर हो गया था। पैसे इलाज में खर्च हो गए थे। राशन तक नहीं बचा था। टीआई ने उनकी समस्या सुनी और मदद की।
सिद्धार्थ बहुगुणा, एसपी
वर्जन-ये प्राकृतिक विपदा है। इस तरह के संकट काल से निपटने के लिए पुलिस को ट्रेनिंग दी जाती है। मानवीय दृष्टिकोण अपना कर पुलिस को अपना रूप बदलना होगा। संवेदनशीलता, मानवीयता अपनाकर हम मदद कर सकते हैं।
भगवत सिंह चौहान, आईजी

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govind thakre Editorial Incharge
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