Patrika keynote 2018: भारत से जुड़ी नीतियों में पाकिस्तान में की फौज का होता है दखल, देखें वीडियो

Patrika keynote 2018: भारत से जुड़ी नीतियों में पाकिस्तान में की फौज का होता है दखल, देखें वीडियो

Prem Shankar Tiwari | Publish: Sep, 05 2018 09:15:03 PM (IST) | Updated: Sep, 06 2018 12:23:41 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

पूर्व आर्मी कमांडर अरुण कुमार साहनी का बयान, कहा पाकिस्तानी सरकार को थोड़ा समय दे भारत

जबलपुर। पाकिस्तान में भारत से जुड़ी किसी भी नीति में वहां की सरकार से ज्यादा फौज का दखल होता है। इस बात को हम अपने लंबे अनुभवों से समझते आए हैं। पाकिस्तान में चेहरा जरूर राजनीतिक हो सकता है, लेकिन पीछे उनकी सेना का नियंत्रण हमेशा देखने में आया है और पाकिस्तान के इस रवैये में अब तक कोई बदलाव भी नहीं हुआ है। यह कहना है, पत्रिका के कीनोट माय सिटी कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के तौर पर शामिल होने आए भारतीय सेना के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अरुण कुमार साहनी का।


सरकार को वक्त देना चाहिए
विशेष चर्चा में लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, पाकिस्तान में नई लोकतांत्रिक सरकार बनी है और निश्चित रूप से कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले वहां की सरकार को थोड़ा वक्त देना चाहिए, क्योंकि जो पार्टी सत्ता में आई है, उसका कोई लंबा राजनीतिक अनुभव नहीं रहा है। हमारी सरकार ने पाकिस्तान को साफ कर दिया है कि वह उनके देश में आतंकवाद को सहयोग नहीं करे। खासकर फौज उनके पक्ष में नहीं रहे। जब तक फौज का सपोर्ट रहेगा, आतंकवाद नियंत्रित नहीं हो सकता। पाकिस्तान से बातचीत का विकल्प हो, लेकिन वह तब जब उसके नजरिए में बदलाव नजर आए।

कश्मीर में युवाओं को रोजगार मिले

कश्मीर के हालातों पर लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, शांति जरूरी है। वहां के युवाओं को रोजगार का विकल्प मिलना चाहिए। यदि उन्हें व्यस्त रखा जाता है तो हालात जल्दी नियंत्रित होंगे। यह तभी हो सकता है जब घाटी का जुड़ाव देश के अन्य हिस्सों से हो सकता है। अभी बर्फबारी या बारिश में यह प्रदेश देश के दूसरे हिस्सों से कट जाता है, इसलिए अधोसंरचना का विकास किया जाए। इस काम में तेजी आई है। हालंाकि, लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की परेशानी दूसरी है। उसका निराकरण राजनीतिक रूप से हो सकता है।

चीन की रणनीति हमारे लिए घातक

आर्मी के शीर्ष अधिकारी रहे साहनी ने चीन और भारत के बीच डोकलाम विवाद पर कहा, यह मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन यह कभी भी उभर सकता है। चीन जिस तरह से भूटान को ऑफर दे रहा है, उससे विवाद खड़ा हो सकता है, इसलिए देश की कनेक्टिविटी भूटान के साथ-साथ बांग्लादेश के साथ हो। यदि भूटान के रास्ते चीन रणनीति बना रहा है तो वह हमारे लिए घातक होगी, क्योंकि वह जिस तरह की अधोसंरचना बनाएगा, उससे वह ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। इससे देश की फौज पर खतरा बढेग़ा, इसलिए हमें अपनी सीमा तक सड़क और दूसरी अधोसंरचना के निर्माण का काम तेज करना होगा।

नक्सलियों के लिए फौज की जरुरत नहीं

देश के भीतर बढ़ते नक्सलवाद पर लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, नक्सलियों के सफाए में सीधे रूप से फौज की तैनाती के पक्ष में वह नहीं है। राज्यों को अपने ही तरीकों और संसाधनों से इसका समाधान करना बेहतर विकल्प होगा। उनका कहना था कि फौज ने जरूर अर्धसैनिक बल एवं राज्यों की पुलिस को टे्रनिंग दी है। इसके जरिए वह उन पर नियंत्रण रख सकती है ।

 

 

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned