Corona : एनआईआरटीएच लैब में ऐसे होती है कोरोना संक्रमितों के सैम्पल की जांच

शहर सहित महाकोशल और विंध्य अंचल में कोरोना टेस्ट के लिए एकमात्र लैब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ (एनआईआरटीएच) है।

By: praveen chaturvedi

Updated: 23 Apr 2020, 06:05 PM IST

जबलपुर। कोरोना संकट पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य, पुलिस और प्रशासन की टीम ने मोर्चा सम्भाला हुआ है। इन सबके बीच कुछ वैज्ञानिक और टेक्नीशियंस चर्चाओं से दूर कोविड-19 के टेस्ट में जुटे हुए हैं। शहर सहित महाकोशल और विंध्य अंचल में कोरोना टेस्ट के लिए एकमात्र लैब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ (एनआईआरटीएच) है। लैब में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कोरोना संदिग्धों के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। आईसीएमआर की इस संस्था में विशेषज्ञ और उनके सहायक कोरोना की जांच और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

लम्बी है प्रक्रिया
लैब में कोरोना परीक्षण के लिए दो-चरण का रियल टाइम पीसीआर किया जाता है। अस्पतालों से भेजे गए सैम्पल को पहले लैब में आरएनए में बदला जाता है। यह जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। तैयार आरएनए को अलग रखा जाता है। इसके बाद उसे पीसीआर में लगाया जाता है। रियल टाइम पीसीआर मशीन से संदिग्ध मरीज का सैम्पल पॉजिटिव है या निगेटिव के लक्षण का पता चलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार आरएनए एक्सट्रैक्शन में ज्यादा समय लगता है। इसलिए जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में आठ से नौ घंटे लगते हैं।

फॉर्म की जांच से शुरू होता है काम
शहर सहित आसपास के कई जिलों से कोरोना संदिग्धों के सैम्पल एनआइआरटीएच भेजे जाते हैं। लैब में सैम्पल के साथ भेजे गए फॉर्म की जांच कर नमूना लेने के कारण का पता लगाया जाता है। उसके बाद नमूने लाइन लिस्ट किए जाते है। फिर टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए संदिग्ध के थ्रोट स्वाब के नमूने लिए जाते हैं। आईसीएमआर के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. तापस चकमा के अनुसार इंस्टीट्यूट आदिवासी क्षेत्रों में होने वाले रोगों पर शोध करता है। पहले भी कई संक्रमणों की जांच की जा चुकी है। इस समय ज्यादा से ज्यादा नमूनों की जांच कर रिपोर्ट देने का प्रयास कर रहे हैं।

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