यात्रियों को घर पहुंचाने के नाम पर परोस रहे महामारी!

यात्री बसों में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं, सुरक्षा नियम दरकिनार, २२ यात्रियों की जगह भरी जा रही पूरी बस

 

By: manoj Verma

Published: 21 May 2020, 11:30 PM IST

ये है स्थिति

८०० यात्री प्रतिदिन बाहरी राज्यों से आ रहे

४० बसें लगी हैं घर छोडऩे

२२ लोगों का स्टाफ चिकित्सा देखरेख में

०२ वेटिंग हॉल में बैठक व्यवस्था
जबलपुर.

लॉकडाउन में बाहरी जिलों से आने वाले यात्रियों को घर तो पहुंचाया जा रहा है लेकिन उनकी सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जिससे उनमें महामारी फैलने की आशंका है। यात्री बसों में सरकार द्वारा तय की गई क्षमता से अधिक यात्री बिठाए जा रहे हैं। पत्रिका ने जब इस मामले में लाइव कवरेज किया तो यह सामने आया कि बस के भीतर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं थी और न ही सेनेटाइजेशन किया गया था। बस में क्षमता से अधिक लोग सवार थे।
अंतरराज्यीय बस टर्मिनस (आईएसबीटी) में मध्यप्रदेश के बाहरी राज्यों सहित अन्य जिलों में फंसे लोगों को बसें ला रही हैं। यात्रियों की थर्मल स्केनिंग और भोजन देने के बाद उन्हें नजदीकी जिले में जाने के लिए बस मुहैया करवा रहे हैं। इनमें बड़ी और छोटी दोनों ही प्रकार की बसें लगी हुई हैं, जिनकी क्षमता क्रमश: ३५ और ५० सीटर है।

यात्रियों से खचाखच भर रही बसें
बस अड्डे पर यात्रियों से खचाखच बसें भरी जा रही हैं। आलम यह है कि कन्डेक्टर सीट से लेकर पीछे तक यात्री बैठ रहे हैं। इनमें तीन सीट पर तीन यात्री और दो सीट पर दो ही यात्री बैठ रहे हैं।

ये हुआ था तय : यात्रियों को उनके घर छोडऩे के लिए सोशल डिस्टेंस बनाते हुए तीन सवारी सीट में दो यात्री एवं दो सवारी सीट में एक यात्री बैठेगा। यात्री बिठाने के पूर्व बसे सेनेटाइज्ड होगी।
ये थी हकीकत
आईएसबीटी के मुख्यद्वार के समीप ही पचास सीटर बसें खड़ी थीं। ये बसें बरेला, कुंडम, मंडला, नैनपुर, निवास आदि की ओर यात्रियों को ले जाने वाली थीं। ये बसें एक दूसरे से सटकर खड़ी हुई थीं। बसों में सामान्य तरीके से यात्री बिठाए जा रहे थे। सोशल डिस्टेंसिंग ही नहीं थी। बसों के अंदर हालत यह थी कि तीन सवारी सीट पर एक ओर २४ लोग थे। दो सीट वाली पर १६ सवारी सहित कन्डेक्टर सीट पर तीन एवं पीछे की सीट पर चार सवारी बैठी थी।
आईएसबीटी की आंतरिक व्यवस्थाएं हम देख रहे हैं। यात्रियों को भोजन-पानी और सुरक्षा की हमारी जवाबदारी है। यात्री परिचालन संबंधी व्यवस्थाएं जिला प्रशासन देख रहा है।
सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल
बस कम आ रही है। होता यह है कि बस स्टैंड पर बाहर से आने वाले यात्री रूकना नहीं चाहते हैं और वे बसों में सवार होकर घर पहुंचना चाहते हैं। हम बस बढ़ाने के लिए बातचीत करेंगे।
रश्मि चतुर्वेदी, तहसीलदार

manoj Verma Reporting
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