आम-अमरूद और नींबू की बढेग़ी पैदावार

जिले में तैयारियां, अभी 92 हजार मीट्रिक फलों का उत्पादन, उद्यानिकी विभाग ने बनाई योजना

 

 

जबलपुर. सब्जियों के साथ जिले में अब फलों के उत्पादन का रकबा बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है। जिला उद्यानिकी विभाग ने इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित करना शुरू किया है। जिले में अभी करीब 350 ऐसे किसान हैं जो बड़े पैमाने पर फलों की खेती करते हैं। शासन की फल पौध रोपण योजना के माध्यम से इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। क्योंकि अभी जरुरत व खपत के मुताबिक फलों की पैदावार नहीं होती। ऐसे में आम-अमरूद और नींबू जैसा फल भी महंगा बिकता है।

जिले में अभी करीब 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फलों की खेती की जाती है। हर साल करीब 92 हजार मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। अब इसे 5 से 8 फीसदी बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में जिले में सबसे ज्यादा रकबा एवं पैदावार अमरूद, आम, सीताफल, नींबू और कटहल की होती है। इनका रकबा बढ़ाया जा रहा है, साथ ही केला, अनार, पपीता, मौसम्मी और तरबूज तथा खरबूज की पैदावार बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि फलों का रकबा बढ़ाना आसान नहीं होता। क्योंकि कई फलों के पौधे देर में तैयार होते हैं।

​​production of fruits

कुछ फलों को प्राथमिकता

जिले में अभी फल पौध रोपण योजना में आम, अमरूद, नींबू और अनार को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसमें पौधों के अलावा सिंचाई के उपकरणों के लिए अनुदान की योजना है। इसलिए अब छोटे किसानों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए उन्हें यह बात भी बताई जा रही है कि इसके जरिए उनकी आय में भी इजाफा होगा।

जिले में फल उत्पाद की स्थिति

2017-18
फल- रकबा- उत्पादन

आम- 1276- 13,270
पपीता- 402- 7356

अमरूद- 1382- 17,364
सीताफल- 382- 7658

बेर- 171- 937
केला- 184- 7653

आंवला- 850- 4841
अनार- 120- 1200

नींबू- 1009- 12,170
तरबूज- 77- 1552

मोसम्मी- 16- 190
कटहल- 406- 13030

2018-19
फल- रकबा- उत्पादन

आम- 1340- 13933

पपीता- 422- 7724

अमरूद- 1452- 18232

सीताफल- 401- 8041

बेर- 180- 983

केला- 194- 8036
आंवला- 895- 5090

अनार- 125- 1260
नींबू- 1060- 12780

तरबूज- 80- 1640
मोसम्मी- 17- 195

कटहल- 476- 13689

नोट: रकबा हेक्टेयर और उत्पादन मीट्रिक टन में


जिले में फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ देने के साथ ही किसानों को इसके लाभों से अवगत कराया जा रहा है।
एसबी सिंह, डिप्टी डायरेक्टर उद्यानिकी विभाग

gyani rajak Reporting
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