इस शख्सियत ने दिलाई थी झांसी की रानी को ये शोहरत

इस शख्सियत ने दिलाई थी झांसी की रानी को ये शोहरत

deepak deewan | Publish: Feb, 15 2018 10:15:18 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

- खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी... कविता बच्चों-बच्चों की जुबां पर आज भी है

जबलपुर . खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी... कविता बच्चों-बच्चों की जुबां पर आज भी है। इस कविता को गढऩे वाली कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने कई रचनाएं लिखीं, लेकिन प्रसिद्धि उन्हें इसी कविता ने दिलाई। सुभद्रा ताई ने वीरांगना रानी दुर्गावती के शहर में वीर रस से ओतप्रोत अनेक राष्ट्रवादी कविताएं लिखीं। संस्कारधानी को कार्यक्षेत्र बनाया और यहां से ही लेखन की शुरुआत की। शादी के बाद वे यहीं पर आकर रहने लगी और स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुभद्राकुमारी चौहान की आज (१५ फरवरी) पुण्यतिथि है। उनके गुजरने के सालों बाद भी यह शहर उनको याद करता है। एक संस्था समय-समय पर विविध आयोजन करती है, वहीं बच्चों ने भी उनके जीवन को रंगमंच पर उतार दिया।


संस्कारधानी में ही पूरा लेखन
साधना उपाध्याय ने बताया कि त्रिवेणी परिषद् द्वारा हर साल उनकी जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर आयोजन किया जाता है। सुभद्रा ने जबलपुर में आने के बाद ही अपना लेखन कार्य प्रारंभ किया था। यहीं पर पूरा लेखन कार्य किया। स्वतंत्रता की लड़ाई में वे दो बार जेल भी गईं। जिस कविता से उन्हीं प्रसिद्धि मिली थी, वह भी उन्होंने जबलपुर में ही लिखी थी। उनके द्वारा लिखित कविताओं और गीतों ने कई भारतीय युवाओं को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने लेखों में मुख्य रूप से हिंदी की सरल और स्पष्ट खड़ीबाली बोली का प्रयोग किया है। उन्होंने बच्चों के लिए भी कविताएं लिखी है।


'मिला तेज से तेज में उतारा जीवन
बालभवन के कलाकारों ने सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन अलग तरह से पेश किया। मिला तेज से तेज नाम के नाटक में संजय गर्ग ने सुभद्रा के जीवन को प्रस्तुत किया। तकरीबन १५ बाल कलाकारों की टीम इसका मंचन कर रही है। यह नाटक सुभद्रा की बेटी द्वारा लिखित है। कलाकार श्रेया खंडेलवाल ने बताया कि इस नाटक में सुभद्रा के बचपन से लेकर अंत तक के जीवन को उतारा गया है। इसके अलावा एनएसडी में शहर से ही जुड़े अभिताभ श्रीवास्तव ने सुभद्रा नाम का नाटक तैयार किया था। वह नाटक जबलपुर के मंच पर खेला जा चुका है।


ये हैं उनकी रचनाएं
अनोखा दान, जलियांवाला बाग में वसंत, झांसी की रानी, झांसी की रानी की समाधि पर, झिलमिल तारे, ठुकरा दो या प्यार करो, पानी और धूप, यह कदम्ब का पेड़, प्रतीक्षा मेरा नया बचपन, राखी की चुनौती, विजयी मयूर, विदा, वीरों का कैसा हो वसंत, वेदना, व्याकुल चाह, समर्पण, स्वदेश के प्रति।


नगर निगम और घर में प्रतिमा
सुभद्रा कुमारी चौहान की एक प्रतिमा नगर निगम में है, वहीं दूसरी प्रतिमा उनके घर में रखी गई है। राइट टाउन गौमाता चौक के पास उनका निवास था, जहां वर्तमान में उनकी बड़ी बहू मनोरमा एवं अन्य सदस्य रहते हैं। जिस घर में सुभद्रा रहती थी, वहां पर अब गाडि़यां रखी जाती है और वह कच्चा मकान आज भी उसी अवस्था में है।

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