मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने नियमों में किया बड़ा फेरबदल, 50 से कम नम्बर में भी पास हो सकेंगे एमबीबीएस

मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने नियमों में किया बड़ा फेरबदल, 50 से कम नम्बर में भी पास हो सकेंगे एमबीबीएस
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Abhishek Dixit | Publish: Apr, 02 2019 11:11:11 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

नियम में किए गए बदलाव वर्तमान सत्र से ही लागू कर दिया गया

जबलपुर. एमबीबीएस की परीक्षा में अब इंटरनल में 50 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त होने पर भी विद्यार्थी पास हो सकेंगे। मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने मेडिकल की परीक्षा उत्तीर्ण करने और न्यूनतम प्राप्तांक के नियम में बदलाव कर दिया है। नई व्यवस्था का लाभ उन छात्र-छात्राओं को होगा जिनका एग्रीकेट 50 प्रतिशत या उससे अधिक होगा। ऐसे विद्यार्थियों को इंटनरल में न्यूनतम 35 अंक प्राप्त होने पर भी उत्तीर्ण घोषित किया जाएगा। नियम में किए गए बदलाव वर्तमान सत्र से ही लागू कर दिया गया है। इस वर्ष की एमबीबीएस की परीक्षा में शामिल समस्त छात्र-छात्राओं को न्यूनतम प्राप्तांक में छूट का लाभ मिलेगा।

तीनों परीक्षा में अलग-अलग अंक
एमबीबीएस की परीक्षा के लिए अभी तक छात्र-छात्राओं को तीन वर्ग में अलग-अलग प्राप्तांक हासिल करने होते थे। इंटनरल में न्यूनतम 50 अंक प्राप्त करने के साथ ही थ्योरी और प्रेक्टिकल की उत्तीर्ण की गई परीक्षा के नंबर को मिलाकर कम से कम 50 प्रतिशत एग्रीकेट चाहिए होता था। इस नियम से कुछ छात्र-छात्राएं थ्योरी और प्रेक्टिकल में अच्छे अंक अर्जित करने के बावजूद उन्हें कॉलेज से इंटरनल में कम से कम 50 नंबर नहीं दिए जाने से फेल हो जाते थे।

35-50 के बीच वाले पास
यूनिवर्सिटी में नियम बदलने के साथ ही एमबीबीएस के दो दिन पहले घोषित नतीजे में उसे क्रियान्वित भी कर दिया है। इसमें इंटरनल में 35 से 50 के बीच नंबर हासिल करने के बावजूद एग्रीकेट 50 फीसदी होने पर उत्तीर्ण घोषित किया गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ विद्यार्थी थ्योरी, प्रेक्टिकल में अलग-अलग उत्तीर्ण होने के साथ ही पचास प्रतिशत से अधिक एग्रीकेट हासिल करता है और उसके इंटरनल में नंबर 35 या उससे अधिक है तो वह उत्तीर्ण माने जाएंगे।

एमबीबीएस की परीक्षा में छात्र का एग्रीकेट पचास फीसदी या उससे अधिक है और ऐसे विद्यार्थी को इंटरनल में 35 से 50 प्राप्तांक है तो वह उत्तीर्ण होगा। यह निर्णय थ्योरी एवं प्रेक्टिकल में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के हित में किया गया है।

डॉ. आरएस शर्मा, कुलपति, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय

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