मध्यप्रदेश के इस खूबसूरत शहर में अफ्रीका, यूरोप और हिमालय से आ रहे प्रवासी पक्षी

अपने शहर की आबोहवा है खास, हर साल खिंचे चले आते हैं प्रवासी पक्षी

By: abhishek dixit

Published: 06 Jan 2020, 05:11 PM IST

जबलपुर. शहर की प्राकृतिक खूबसूरती हर किसी को आकर्षित करती है। ताल और तलाबों का शहर होने के कारण यहां की नैसर्गिक सुंदरता हर हिस्से में बसी हुई है। शहर के प्रति एक खिंचाव ही है जो लोगों के साथ.साथ परिंदों को भी खींच कर ले आता है। शहर की आवोहवा और भोजन-पानी की पर्याप्त परिंदों को दूर क्षेत्रों से यहां आने पर मजबूर कर देती है। बेमिसाल जलवायु और अनुकूलता के कारण पक्षियों को भी यह शहर उनका अपना सा लगता है, शायद तभी अफ्रीका, यूरोप और हिमालय तक से पक्षियों की कई प्रजातियां शहर आना पसंद करती हैं। इस राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर आइए जानते हैं शहर के किस तरह शहर में पक्षियों की नई प्रजातियां देखने को मिल रही है।

इन बड्र्स की दिख रही संख्या
- पेंटेंड फ्रैंकलिन
- रेड जंगल
- शल्क डक
- स्टॉक एरिशन
- ब्लूथ्रोट बर्ड
- रेड क्रेस्टेड पोचर्ड
- ब्लैक नेक्ड स्टार्ट
- रेड ब्रेस्टेड फ्लाईकैचर

इन जगहों पर दिखती हैं बड्र्स
- बारहा
- नुनसर
- ग्वारीघाट
- डुमना
- देवताल
- नयागांव
- सूपाताल
- भेड़ाघाट

 

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IMAGE CREDIT: patrika

बड्र्स वॉचर्स बनाए रहते हैं नजर
शहर के वड्र्स वॉचर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके कारण अब शहर के उन पक्षियों को भी सर्वे में शामिल कर लिया गया है, जो कि युवा बड्र्स वॉचर्स द्वारा खोजी गई हैं। इसमें सीनियर फोटोग्राफर्स के साथ अब अलग प्रोफेशन से जुड़े लोग भी शौकिया फोटोग्राफी करना भी पसंद कर रहे हैं।

पैशन और प्रोफेशन दोनों बरकरार
डॉ. विजय सिंह यादव पैशन और प्रोफेशन दोनों बरकरार रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से बड्र्स वॉचिंग का शौक रखते हैं। इन सालों में पक्षियों की कई नई प्रजातियां देखने को मिली हैं।

मोबाइल टावर्स से कम हुई संख्या
सीनियर फोटोग्राफर संजय पशीने ने बताया कि मोबाइल टावर्स के कारण शहर में पक्षियों की संख्या कम हो रही है। प्रवासी पक्षी आते हैं लेकिन सीमेंटीकरण के कारण ग्रामीण जगहों का रुख कर रहे हैं, ताकि उन्हें वहां खाना मिल सके।

घंटों करते हैं रेयर बड्र्स का इंतजार
नीरज वेगड़ ने बताया कि उन्होंने शौकिया तौर शुरू की गई फोटोग्राफी को बड्र्स वॉचिंग के रूप में बदल दिया है। जलवायु के अनुकूल होने के कारण यहां कई पक्षी आना पसंद करते हैं।

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