यहां के खननकर्ता बने पर्यावरण के दुश्मन

भरपायी के लिए नहीं हो रहा पौधरोपण

Mines owners become environmental enemies

जबलपुर। आयरन ओर, डोलामाइट, मैग्नीज और लेटराइट का होना जबलपुर और आसपास के इलाके में पर्यावरण के लिए भारी पड़ रहा है। खनिज निकालने के लिए गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं। कई पहाडिय़ों को सपाट कर दिया गया है। वैध खदानों में तो लापरवाही बरती ही जा रही है, अवैध रूप से भी खनिज का अंधाधुंध खनन हो रहा है। सिहोरा स्थित खदानों में अवैध उत्खनन कर ग्रीन बेल्ट को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है। खनन पट्टों की आड़ में वृहद स्तर पर अवैध उत्खनन भी किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी खनिज विभाग, वन विभाग व राजस्व विभाग की है। लेकिन इन विभागों के अधिकारी गाहे-बगाहे कोई बड़ी कार्रवाई करते हैं। इसके कारण अवैध उत्खनन थम नहीं रहा है।

ज्यादातर खदानों के संचालक आसपास के पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। लेकिन, उसकी भरपाई के लिए न तो पौधरोपण ही किया जा रहा है और न उनके द्वारा विकास कार्यों के लिए ड्रिस्ट्रिक्ट माइनिंग फं ड में ही ठीक ढंग से सहभागिता की जा रही है। इसी तरह से क्रशर संचालक और रेत के ठेकेदार भी पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा भी नहीं बरती जा रही है। जिसके कारण पिछले साल में कई श्रमिकों की मौत भी हो चुकी है।
छाई रहती है धुंध
मानेगांव, अमझर व जिले के अन्य स्थलों पर संचालित क्रशर जमकर प्रदूषण फै ला रहे हैं। दरअसल डेढ़ सौ से ज्यादा क्रशर संचालित हैं। नियमानुसार इन्हें चारों ओर से कवर्ड किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं पानी का भी छिड़काव किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किए जाने के कारण शहर के एंट्री प्वाइंट्स में धुंध छाया रहता है। जानकारों की मानें तो इन इलाकों में पीएम 10 का स्तर पूरे समय बढ़ा रहता है।
नर्मदा की बिगड़ रही सेहत
नदी में पानी के अंदर से रेत निकालना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नर्मदा और सहायक नदी हिरन, गौर, परियट में हाईफाई डिवाइस लगाकर पानी के अंदर से रेत निकाली जा रही है। स्वीकृत खदानों की आड़ में रेत का जमकर अवैध उत्खनन हो रहा है। जिससे नदी के ग्रीन बेल्ट को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। नदी के तटों में कटाव बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि चार साल से गर्मी के दिनों में नर्मदा की सहायक नदियां सूख रही हैं। नर्मदा की धार भी ज्यादातर स्थानों पर बिल्कुल पतली हो जा रही है।
खनिज निरीक्षक देवेंद्र पटले का कहना है कि अवैध उत्खनन की सूचना मिलने पर टीम मौके पर जाकर कार्रवाई करती है। अवैध उत्खनन का मामला दर्ज करने के साथ ही खननकर्ता पर बड़ा जुर्माना भी लगाया जाता है। खनिज ठेक ों में जहां पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया जाता है, इससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है। लेकिन अवैध उत्खनन से पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
जिले में खदान
-14 आयरन ओर
-09 डोलोमाइट
-12 मैग्नीज
-10 लेटराइट
-150 क्रशर संचालित
-47 खदान रेत की
-17 करोड़ रुपए डीएमएफ में जमा हुए चार साल में
-4.25 करोड़ रुपये औसतन हर साल हुए जमा

shyam bihari Desk
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