सीएम हाउस के सामने छात्राओं से बदसलूकी, हाईकोर्ट में सरकार ने दिया ये जवाब

व्यापमं घोटाले के व्हिसिल ब्लोअर डॉ. आनंद राय ने दायर की थी याचिका

By: Premshankar Tiwari

Published: 24 Jul 2018, 10:08 PM IST

 

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने गत जनवरी में मेडिकल छात्राओं की ओर से मुख्यमंत्री निवास के सामने किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बदसलूकी के मसले पर दायर जनहित याचिका निरस्त कर दी है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस आरके श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने सरकार के इस जवाब पर याचिका खारिज कर दी कि भोपाल एसपी ने मामले की जांच करा ली है। जांच में किसी पुलिस या शासकीय कर्मी को दोषी नहीं पाया गया।

बाल पकड़कर खींचा
व्यापमं मामले के व्हिसिल ब्लोअर इंदौर निवासी आनंद राय ने याचिका दायर की थी। अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि 19 जनवरी 2018 को भोपाल के आरकेडीएफ कॉलेज की 60-70 छात्राएं मुख्यमंत्री निवास के सामने प्रदर्शन कर रही थीं। इसके लिए महिला पुलिस कर्मियों को तैनात नहीं किया गया। नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस आरक्षकों ने छात्राओं के बाल पकड़कर खींचे। जबकि, दंड प्रक्रिया संहिता के तहत किसी भी महिला को हाथ लगाने का अधिकार सिर्फ महिला आरक्षक को है।

रखी गई पत्रिका की प्रति
अधिकारियों की मौजूदगी में पुरुष आरक्षकों ने छात्राओं की मर्यादा का उल्लंघन किया। दैनिक पत्रिका भोपाल के 20 जनवरी के अंक में प्रकाशित समाचार की प्रति कोर्ट के पटल पर रखी गई। कहा गया कि प्रकाशित समाचार और चित्र इस बात को साबित करते हैं। जबकि, शासकीय अधिवक्ता अमित सेठ ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जिन छात्राओं से बदसुलूकी का आरोप है, उन्होंने भी ऐसी घटना से इनकार किया है। इसे संज्ञान में लेकर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

चर्चाओं में रहा मामला
उल्लेखनीय है कि आरकेडीएफ कॉलेज की छात्राओं का सीएम निवास के सामने हुआ प्रदर्शन चर्चाओं में रहा। छात्राएं कॉलेज से संबंधित मामले की जांच व उस पर कार्रवाई की मांग कर रही थीं। देर तक जब छात्राओं की बात सुनने के लिए कोई नहीं पहुंचा तो वे आक्रोशित हो गईं और प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने पहले छात्राओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वे नहीं मानीं तो हल्का बल प्रयोग किया गया। अधिकारियों का तर्क था कि अनहोनी से बचने के लिए उन्होंने छात्राओं पर हल्का बल प्रयोग किया था। इसमें किसी तरह की ज्यादती के आरोप गलत हैं।

Premshankar Tiwari Desk
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