बुरा फंसा मोखा, सिटी अस्पताल से मिला नकली रेमडेसिविर का बिल, एसआइटी ने किया जब्त

रिमांड खत्म, मोखा को भेजा गया जेल, मोबाइल जब्त नहीं कर पाई एसआइटी

 

 

By: Lalit kostha

Updated: 01 Jun 2021, 03:12 PM IST

जबलपुर। गुजरात से आए नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन खपाने के मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह मोखा की पुलिस रिमांड खत्म होने पर सोमवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। इधर मामले की जांच कर रही एसआइटी ने मोखा के अस्पताल से ही नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का बिल भी जब्त कर लियाा है। यह बिल नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ सपन ने दिया था।

डायमंड कंपनी के नाम का बिल
एसआइटी के अनुसार 23 और 28 अप्रेल को जब नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप इंदौर से सिटी अस्पताल पहुंची, तो उसके साथ डायमंड कंपनी का बिल भी था। दोनों बार का कुल बिल लगभग 15 लाख रुपए था। हालांकि, बिल की राशि भगवती फार्मा के संचालक सपन जैन ने पहले ही रीवा निवासी सुनील मिश्रा को दे दी थी। केवल इस बिल के जरिए सरबजीत सिंह मोखा को सपन को पेमेंट करनी थी। सपन को उसके 15 लाख रुपए मिल पाते, इसके पूर्व यह मामला खुल गया।

एसआइटी के मुताबिक सुनील मिश्रा ने जहां भी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिलेवरी दी, सभी को डायमंड एजेंसी का ही बिल दिया गया था। एसआइटी के मुताबिक सुनील डीमार्ट में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की ओपन ट्रेडिंग कर लोगों से सम्पर्क कर रहा था।
इंदौर पुलिस की रिमांड खत्म होते ही लाए जाएंगे शहर

 

mokha.png

मामले में इंदौर पुलिस भी जांच कर रही है। इंदौर में भी कई आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। यही कारण है कि भगवती फार्मा का संचालक सपन जैन, इंजेक्शन की डिलेंवरी देने वाला रीवा निवासी सुनील मिश्रा और इंदौर निवासी पुनीत शाह व गुजरात निवासी कौलश बोरा इंदौर पुलिस की रिमांड पर है। इंदौर पुलिस सात से आठ तारीख के बीच आरोपियों को न्यायालय में पेश करेगी। इसके बाद जबलपुर की एसआइटी उक्त चारों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर जबलपुर लाकर पूछताछ करेगी।

एसआइटी की जांच पर सवाल

सरबजीत सिंह मोखा को एसआइटी ने जब पुलिस रिमांड पर लिया, तो उसके तत्काल बाद उसके मोबाइल फोन की तलाश की जानी चाहिए थी, लेकिन एसआइटी ने ऐसा नहीं किया। उसकी दोबारा रिमांड ली गई और उसके बावजूद मोखा से उसका मोबाइल फोन टीम जब्त नहंी कर पाई। मोखा का मोबाइल फोन न मिल पाना एसआईटी की कार्रवाई पर सवाल खड़ा कर रहा है।

तत्काल क्यों जब्त नहीं हुआ मोबाइल फोन?
एसआइटी ने सरबजीत सिंह मोखा को उसके अस्पताल से गिरफ्तार किया था। उस वक्त उसके पास मोबाइल फोन था। यह बात स्वयं एसआइटी के अधिकारियों के सामने मोखा ने कबूली। सवाल यह है कि यदि अस्पताल में उसका मोबाइल था, तो उस वक्त उसे गिरफ्तार करने पहुंची टीम ने उसका फोन क्यों जब्त नहीं किया?

Show More
Lalit kostha Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned