सूदखोरी : गंदा है ये धंधा- पैसे हड़पने के लिए लगा देते हैं शराब, चरस का चस्का

छोटे सरकारी कर्मचारियों पर सूदखोरों की रहती है विशेष नजर, रख लेेते हैं चैकबुक, छुड़ा लेते हैं एटीएम कार्ड

जबलपुर। कांचघर के जगदीश चौधरी की सरेआम हत्या के बाद सूदखोरों की करतूतें फिर सुर्खियों में है। मोटे ब्याज पर उधार देने का यह धंधा कुछ लोगों के लिए भले ही गंदा हो पर सूदखोरों को तो कुछ ही दिनों में मालामाल कर देता है। ज्यादातर सूदखोर जरूरतमंदों को उधार देने की बात कहते हैं पर असलियत कुछ और ही है। हकीकत यह है कि लोगों से उनकी गाढ़ी कमाई के पैसे ऐंठने ये कई जतन करते हैं। छोटे सरकारी कर्मचारियों को ये खासतौर पर निशाना बनाते हैं। उन्हें पहले अपने पैसों से शराब से लेकर सेक्स तक उपलब्ध कराते हैं और जहां एक बार उन्हें इन चीजों का चस्का लग जाता है, ये अपने-आप इनके जाल में फंस जाते हैं।


शराब के लिए दिया उधार

ऐसे अधिकांश मामले पुलिसिया जांच में दम तोड़ देते हैं। तीन साल पहले सदर थाने क्षेत्र में एक युवक ने सल्फास की गोली खाकर जान देने की कोशिश की थी।  पीडि़त  दिनेश नामदेव खमरिया व्हीकल फैक्ट्री में काम करता था। अपने कुछ मित्रों की सोहबत मेें दिनेश सूदखोरों के संपर्क में आ गया। उसे कइ शराब पार्टियों में बुलाया गया। जब उसे शराब का चस्का लग गया तो उधार पैसे उपलब्ध कराए जाने लगे और करीब दो साल में ही उसपर दो लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज हो गया। उससे इतने ही रुपए ब्याज के रूप में ही वसूल कर लिए गए थे। 


रख लेते हैं एटीएम

शराब के साथ ही अन्य नशे की लत लगवाने में भी ये लोग माहिर हैं। बताया जाता है कि व्हीकल फैक्ट्री और रेलवे के कई छोटे कर्मचारी सूदखोरों की गिरफ्त में हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मचारियों से सूदखोरों ने ब्लैंक चैक ले रखे हैं। यहीं नहीं कई कर्मचारियों के तो बैंक एटीएम कार्ड भी सूदखोरों के पास ही रखे हैं। तनख्वाह मिलते ही ये सूदखोर या इनके दलाल ब्याज की रकम हड़प लेते हैं। 
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neeraj mishra
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