Election 2018: मप्र के सबसे संवेदनशील चुनाव क्षेत्र, यहां खुलेआम लुट जाता है पोलिंग बूथ!

Election 2018: मप्र के सबसे संवेदनशील चुनाव क्षेत्र, यहां खुलेआम लुट जाता है पोलिंग बूथ!

Lalit kostha | Publish: Sep, 04 2018 10:24:04 AM (IST) | Updated: Sep, 04 2018 12:30:54 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

मप्र के सबसे संवेदनशील चुनाव क्षेत्र, यहां खुलेआम लुट जाता है पोलिंग बूथ!

 

जबलपुर। जिले में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण कराने के लिए अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। अधिकारियों की पहली कोशिश जिले के संवेदनशील बूथों को लेकर आश्वस्त होने की है। इसके लिए थानेवार संवेदनशील बूथों की हिस्ट्री तैयार कराई गई है। इसके लिए हर स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी व चुनाव आयोग समीक्षा कर रहा है।

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चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए ग्रामीणों के सुझाव पर होगा अमल
संवेदनशील बूथ वाले गांवों में चौपाल लगाएंगे पुलिस अधिकारी

एसपी-कलेक्टर से लेकर पुलिस के अन्य बड़े अधिकारी भी सम्बंधित गांवों में चौपाल लगाएंगे। ग्रामीणों से बातचीत कर पता लगाने की कोशिश करेंगे कि चुनाव में किस तरह की दिक्कत होती है? ग्रामीणों में विश्वास पर्ची का भी वितरण किया जाएगा। एसपी अमित सिंह ने बताया कि जिले में 330 बूथ से सम्बंधित गांवों में चुनाव से पहले चौपाल लगेगी। रात्रि चौपाल में वे खुद और दूसरे अधिकारी ग्रामीणों की चुनावों को लेकर शंकाओं का समाधान करेंगे। ग्रामीणों से सुझाव भी लिए जाएंगे। ऐसे संवेदनशील बूथों में चुनाव मित्र बनाए जाएंगे, जो पुलिस और प्रशासन का
सहयोग करेंगे।

संवेदनशील बूथ
- पूर्व में हुए किसी भी चुनाव में विवाद हुआ हो
- बूथ कैप्चरिंग हुआ हो।
- किसी अपराधी द्वारा मतदाताओं को डराया धमका कर मतदान से रोका गया हो
- किसी दो प्रत्याशी से सम्बंधित बूथ हों
- मतदान कर्मियों के साथ किसी तरह का विवाद हुआ हो

शहर में पूर्व और केंट में ही संवेदनशील बूथ
जिले के आठों विधानसभा क्षेत्रों में अधिकतर संवेदनशील बूथ ग्रामीण के पनागर, बरगी, सिहोरा व पाटन में हैं। शहर में सिर्फ पूर्व और केंट विधानसभा क्षेत्र में संवेदनशील बूथ चिन्हित हैं।

42 विशेष क्षेत्र की तैयारी
जिले में 42 ऐसे ‘वल्नरबल पॉकेट’ चिन्हित किए गए हैं, जहां रहने वाले अत्यंत गरीब व कमजोर हैं। यहां के मतदाता प्रत्याशी विशेष या समूह के दबाव में किसी के भी पक्ष में मतदान करते रहे हैं। ऐसे पॉकेट में रहने वाले लोगों से बातचीत कर नम्बर बांटे जा रहे हैं।

स्थाई वारंटी नहीं दे पाएंगे वोट
वहीं पुलिस ने छह महीने से लम्बित 2300 वारंटियों की सूची तैयार करायी है। इन वारंटियों के नाम मतदाता सूची से कटवाने का प्रतिवेदन जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से आयोग को भेजा जाएगा।

दो महीने का विशेष अभियान शुरू
डीजीपी के निर्देश पर चार बिंदुओं को लेकर दो महीने का विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसमें अवैध शराब बनाने व बेचने वालों पर कार्रवाई करना, गुंडा-बदमाशों को जिला बदर व रासूका में निरुद्ध करना, वारंटियों की धरपकड़ शामिल हैं।

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