इस घरेलू जायके से भीषण गर्मी में भी खिला रहेगा चेहरा, रोग रहेंगे दूर

इस घरेलू जायके से भीषण गर्मी में भी खिला रहेगा चेहरा, रोग रहेंगे दूर
Summer tips from heat relief

Prem Shankar Tiwari | Updated: 29 Apr 2017, 08:12:00 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हमारे पूर्वज करते थे इसका इस्तेमाल, बाजार में अब भी बरकरार है इसका क्रेज

जबलपुर। गर्मी का मौसम है। सूरज आग उगल रहा है। उमस और लू बेचैन कर रही है। ऐसे में खाने-पीने में जरा सी भी चूक सेहत के लिए भारी पड़ सकती है..। अब लोगों के मन में सवाल आता है कि गर्मी में आखिर क्या खाएं? क्या पिएं...? तो हमारे पूर्वजों ने इसके लिए भी खास डिश तय कर रखी हैं। यह बात अलग है कि व्यस्तता और भौतिकता की अंधी दौड़ में अधिकांश लोग इससे दूर हो गए हैं, लेकिन जिन्हें इसके राज मालूम हैं वे आज भी गर्मी आते ही इस खास देशी डिश की तैयारी शुरू कर देते हैं। कई घरों में अब यह सुबह के नाश्ते में शामिल भी हो गया है। कुछ लोग समझ गए होंगे कि बात सत्तू की हो रही है। ग्रामीण अंचलों में इसे सतुआ भी कहा जाता है। डायटीशियन्स भी मानते हैं कि सत्तू का जायका गर्मी के लिए बेहद सुरक्षित, फायदेमंद और रामबाण है।



Summer tips from heat relief


क्या है सत्तू
सत्तू, पुरातन काल से चली आ रही एक देशी डिश है, जिसका सेवन खासकर गर्मियों में किया जाता है। यह चना, जौ, धनिया, जीरा, सौंफ और चीनी आदि के मिश्रण से तैयार किया जाता है। डायटीशियन डॉ. रंजना शुक्ला बताती हैं कि सत्तू में विटामिन बी, विटामिन ए, विटामिन सी के साथ सभी तरह के मिनरल्स होते हैं। सबसे अहम बात यह है कि इसके खाने से तरावट आती है। बार-बार प्यास लगने की समस्या भी दूर होती है। यह सबसे सस्ता, धरेलू और बेहद पौष्टिक व्यंजन है।




ऐसे बनता है सत्तू
सत्तू का निर्माण अब भी जबलपुर निवाडग़ंज स्थित भड़भूंजा गली समेत अन्य कई स्थानों पर होता है। गर्मी में इसकी खासी डिमांड होती है। यह मंदिरों और तीर्थ स्थलों के आसपास दुकानों में ज्यादा बिकता है। पीढिय़ों से इसका इसका निर्माण कर रहे 85 वर्षीय सुखलाल गुप्ता ने बताया कि सत्तू के लिए पहले चना को करीब 12 घंटे पानी भिगोया जाता है। दूसरे दिन इसको हल्का सुखाकर भूना जाता है। कई लोग भुने हुए चने का छिलका उतार लेते हैं। इसके बाद भुने हुए चनों में गेहूं, जवा, जीरा, सौंफ, नमक आदि मिलाया जाता है। सभी को एक साथ मिश्रित करके चक्की या मिक्सी में पीस लिया जाता है। इसे चलनी से छानकर आटा तैयार कर लिया जाता है। यही आटा सतुआ या सत्तू कहलाता है। इसके आटे में स्वाद अनुसार शक्कर व पानी मिलाकर इसे रबड़ी की तरह घोल लिया जाता है। यही रबड़ी नुमा सतुआ गर्मी से राहत दिलाने में रामबाण का काम करता है।




निर्माण सामग्री व मिश्रण

    भुना हुआ चना - 1 किलो
    भुना हुआ गेहूं  - 250 ग्राम
    जौ (जवा) - 100 ग्राम
    जीरा - 30 ग्राम
    धनिया पाउडर  - 20 ग्राम
    नमक - 15 ग्राम
    सौंप या सोंठ   -   50 ग्राम
    पुदीना, कालीमिर्च, धनिया, मैथी आदि का सूखा पाउडर  -   30 ग्राम




कई दिनों का इंतजाम
सतुआ के आटे को सामान्य गेहूं के आटे की तरह एयरप्रूफ डिब्बे में बंद करके रख लें। यह कई दिन तक काम आता है। सुबह नाश्ते का समय हो तो इस आटे में पानी या दूध और स्वाद अनुसार शक्कर मिलाकर उसे सभी को परोसा जा सकता है। नमकीन के शौकीन इसे रबड़ी की तरह घोलकर जलजीरा, गरम मसाला, नीबू और नमक आदि के साथ भी खा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि सत्तु काफी हैवी व पौष्टिक होता है। इसका सेवन रात्रि की बजाय दिन में सुबह करना चाहिए। यह दिन भर के लिए कैलोरी व तरावट प्रदान करता है। इसका जायका यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, एमपी के बुंदेलखंड, विंध्य और महाकोशल अंचल में विशेष रूप से प्रचलित है।
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