भूकंप से दहला था मप्र का शहर, इतने सो गए मौत की नींद

भूकंप से दहला था मप्र का शहर, इतने सो गए मौत की नींद

By: Lalit kostha

Published: 22 May 2019, 11:10 AM IST

जबलपुर . दीवारों में पड़ी मोटी दरार तो कहीं मलबे का ढेर, अपनों को गवां चुके रोते-बिलखते लोग, उस मंजर की यादें आज भी जबलपुरवासियों को दहला देती हैं। बाइस साल पहले जब अलसुबह आए भूकं प ने नर्मदा बेसिन में हलचल मचा दी थी। लेकिन दो दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद शहरी क्षेत्र में तस्वीर ज्यादा नहीं बदली। भूकं प के लिहाज से अति संवेदनशील जिलों में शामिल जबलपुर में आज भी हजारों परिवार कच्चे मकानों और झुग्गी बस्तियों में निवासरत हैं। भूकं प रोधी भवनों के निर्माण की दिशा में आवास योजनाओं की सुस्त चाल सबसे बड़ी रुकावट बनी है। जिसके कारण अब तक ज्यादा परिवारों को सुरक्षित आशियाना नहीं मिल सका है।

मनमाने निर्माणों पर रोक नहीं
भूकं प के लिहाज से अति संवेदलनशील होने के कारण नर्मदा बेसिन पर बसे शहर में प्रत्येक निर्माण भूकं प रोधी तकनीक से होना चाहिए। ये सुनिश्चित कराना नगर निगम की भवन शाखा व कॉलोनी सेल की जिम्मेदारी है। लेकिन हद तो ये कि शहर में हर साल बड़ी संख्या में ऐसे निर्माण हो रहे हैं, जिनमें निगम से नक्शा भी पास नहीं कराया जाता है। ऐसे प्रकरणों में जांच कर नियमों व निर्धारित मापदंडों के अनुसार भवन का निर्माण कराना ये निगम के भवन शाखा से जुड़े मैदानी अमले का काम है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

news facts-

- भूकं प के 22 साल, अब भी शहर में नहीं बन रहे भूकं परोधी मकान
- आज भी हजारों लोग कच्चे झोपड़ीनुमा भवनों में रहने मजबूर

यह है स्थिति
-22 मई 1997 को आया था भूकं प
-कोसमघाट था भूकं प का केन्द्र
-नर्मदा फाल्ट था कारण
-39 लोगों की हुई थी मौत
-350 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से हुए थे घायल
-2539 गांव हुए थे प्रभावित
-34537 परिवार हुए थे बेघर
-3.23 लाख मकान हुए थे क्षतिग्रस्त
-5 हजार मकान पूरी तरह हो गए थे बर्बाद
-38 अति संवेदनशील जिले में शामिल देश के
-16 अति संवेदनशील जिलों में शामिल प्रदेश के

 

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इन इलाकों में कच्चे निर्माण व झुग्गी बस्तियां

-बाबा टोला, सिद्धबाबा, लालमाटी
-सदर का बगीचा क्षेत्र
-आनंद नगर पहाड़ी अधारताल की बस्ती
-अमखेरा, कुदवारी
-दुर्गानगर भटौली
-परसवारा बस्ती
-रांझी गोकलपुर बस्ती
-मानेगांव, मोहनिया

ऐसा होना चाहिए भूकं प रोधी ढांचा
-कॉलम, बीम युक्त हो भवन
-टू वे क्रें क तकनीक से बंधा हो लेंटर का लोहा
-भवन में कमरे ज्यादा होने पर मुख्य दरवाजे के अलावा आपातकालीन दरवाजे भी हों
-भवन के आकार के अनुसार सरिया, अच्छी गुणवत्ता की सीमेंट, रेत व गिट्टी का इस्तेमाल हो
-स्ट्रक्चर इंजीनियर का लिया जाए मार्गदर्शन


आवास योजना के तहत निर्माणाधीन भवन
-साइट, ईडब्लूएस, एलआईजी, एमआईजी, कुल आवास संख्या,
-मोहनिया, 1008, 96, 96, 1200,
-कुदवारी, 576, 288,288,1152,
-तेवर चरण 1, 864, 288,0,1152,
-परसवारा चरण 1,864,432,432,1728,
-परसवारा चरण 2,768,408408,1584,
-तिलहरी चरण 1, 576,288,288,1152,
-18 महीने प्रोजेक्ट की अवधि


आवास योजनाओं के माध्यम से भवनों का निर्माण होने के साथ ही झुग्गी बस्तियों व कच्चे मकानों में रह रहे हितग्राहियों की शिफ्टिंग की जा रही है। बहुमंजिला भवनों के बन जाने पर काफी हद तक समस्या का निराकरण हो जाएगा।
- जीएस नागेश, अपर आयुक्त, नगर निगम

22 साल पहले नर्मदा बेसिन पर बसे शहरी व ग्रामीण क्षेत्र भूकं प की बड़ी त्रासदी झेल चुका है। ऐसे में आवश्यक है कि भूकं प के लिहाज से अति संवेदनशील जोन में शामिल नगर मे ंनए निर्माण भूकं प रोधी तकनीक से हों। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।
- इंजी संजय वर्मा, सचिव, प्रेक्टिसिंग इंजीनियर एसोसिएशन

 

Lalit kostha Desk
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