MP election 2018: सूबे में बिछी बिसात, ये बागी बिगाड़ेंगे भाजपा और कांग्रेस का गणित

MP election 2018: सूबे में बिछी बिसात, ये बागी बिगाड़ेंगे भाजपा और कांग्रेस का गणित

Prem Shankar Tiwari | Publish: Nov, 10 2018 08:30:48 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 08:30:49 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

नामांकन के साथ ही शुरू हुआ शह और मात का खेल

जबलपुर। सूबे में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। सरदार किस खेमे का होगा, यह बात अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मोहरों के चयन के लिए गुणाभाग शुरु हो गया है। प्रत्याशियों की घोषणा और नामांकन के बाद एक तरफ गली-कूचों में योग्य और अयोग्य की चर्चा छिड़ गई है, वहीं पार्टियों में भी यह मंथन तेज हो गया है कि कौन सा बागी या निर्दलीय उम्मीदवार उनका खेल बिगाड़ सकता है। बागी व निर्दलीय प्रत्याशी की योग्यता के आकलन के साथ पार्टी प्रमुखों ने उन पर डोरे डालना भी शुरू कर दिए हैं। हर किसी का एक ही लक्ष्य है कि ऐसा प्रत्याशी मैदान में बना रहे जो सामने वाले प्रतिद्वंदी के वोट खींचकर लक्ष्य को आसान बना सके। आइए आपको भी बताते हैं कहां कौन प्रत्याशी बिगाड़ सकते हैं खेल...

एक नजर प्रमुख उम्मीदवारों पर

भाजपा - कांग्रेस

उत्तर-मध्य - शरद जैन - विनय सक्सेना
पूर्व - अंचल सोनकर - लखनघोरिया
केंट - अशोक रोहाणी - आलोक मिश्रा
पश्चिम - हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू - तरुण भानोत
बरगी - प्रतिभा सिंह - संजय यादव
सिहोरा - नंदनी मरावी - खिलाड़ी सिंह आर्मो
पाटन - अजय विश्नोई - नीलेश अवस्थी
पनागर - सुशील तिवारी इंदु - सम्मति सैनी


कहां का क्या है गणित?

विधानसभा व क्रमांक - पाटन (95)

भाजपा प्रत्याशी - अजय विश्नोई

गणित - जानकारों के अनुसार पाटन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के बागी के रूप में नारायण सिंह चौधरी व उदय भान सिंह ने पर्चा भरा है। यहीं से सबसे ज्यादा प्रभावी विनय असाटी ने भी नामांकन पत्र खरीदा था, लेकिन भरा नहीं है। यह तय है कि विनय मझौली क्षेत्र की अच्छी खासी वोटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। विश्नोई के प्रति नाराजगी के कारण यदि उनका रुख यूं ही असंतुष्ट रहा तो भाजपा को नुकसान निश्चित है। थोड़ी बहुत वोट पाटन निवासी उदयभान सिंह भी काट सकते हैं। भाजपा के दिग्गजों ने इन दोनों को साधना शुरू कर दिया है। रही बात नारायण सिंह चौधरी की तो इनका प्रभाव करीब 5000 वोटों पर है, लेकिन इसका नुकसान कांग्रेस विधायक नीलेश अवस्थी को अधिक संभावित है। ऐसी चर्चा है कि विश्नोई से नाराजगी के चलते पिछले चुनाव में भी नारायण सिंह ने बगावत करके नीलेश अवस्थी को लाभ पहुंचाया था।

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कांग्रेस प्रत्याशी - नीलेश अवस्थी

गणित - यहां से कांग्रेस से कोई असंतुष्ट या बागी प्रत्याशी सामने नहीं आया है, लेकिन भाजपा के ही नारायण सिंह चौधरी के चुनाव मैदान में रहने से नीलेश अवस्थी को नुकसान संभावित है। कांग्रेसी इस बार फिर चौधरी को साधने की जुगत में हैं।

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विधानसभा व क्रमांक - जबलपुर बरगी (96)

भजपा प्रत्याशी - प्रतिभा सिंह

गणित - भाजपा प्रत्याशी प्रतिभा सिंह के खिलाफ क्षेत्र में असंतोष तो है लेकिर इनके विरोध में कोई विशेष बागी प्रत्याशी सामने नहीं आया है। इनकी बहू ज्योति सिंह ने सपा से पर्चा भरा है, लेकिन इनका कुछ खास प्रभाव नहीं है। इससे भाजपा राहत महसूस कर रही है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - संजय यादव

गणित - बरगी से कांग्रेस प्रत्याशी संजय यादव का काफी विरोध है। यहां से कांग्रेस नेता कौड़ीलाल राय, राजेश सिंह व कीर्तन व्यास ने पर्चा भरा है। कांग्रेस के ही नितिन अग्रवाल भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। यहां से कौड़ीलाल राय व राजेश सिंह दोनों का चुनाव मैदान में रहना भाजपा के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है।

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विधानसभा व क्रमांक - जबलपुर पूर्व (97)

भाजपा प्रत्याशी - अंचल सोनकर

गणित - यहां से अंचल सोनकर को लेकर आंतरिक विरोध है, लेकिन खुलकर कोई सामने नहीं आया है। इसे देखते हुए पार्टी प्रमुखों ने कार्यकर्ताओं को जोडऩा और सक्रिय करना शुरू कर दिया है।

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कांग्रेस प्रत्यशी - लखन घनघोरिया

गणित - पूर्व विधानसभा क्षेत्र में लखन को लेकर कांग्रेस में असंतोष है। यहां से पूर्व पार्षद लक्ष्मी बेन, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर ने नामांकन जमा किया है। वहीं कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता गजेन्द्र उर्फ गज्जू सोनकर ने अभी से विरोध शुरू कर दिया है। पार्टी प्रमुखों ने रोजश सोनकर व लक्ष्मी बेन की मानमनौव्वल शुरू कर दी है। गज्जू को भी समझाया जा रहा है। माना जा रहा है कि इनके बगावती तेवर कांग्रेस प्रत्याशी की राह में बड़ा रोड़ा बन सकते हैं।

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विधानसभा व क्रमांक - उत्तर विधान सभा (98)

भाजपा प्रत्याशी - शरद जैन

गणित - यहां भाजपा के बागी प्रत्याशी धीरज पटेरिया भाजपा के सर्वाधिक वोट काट सकते हैं। धीरज का युवाओं में काफी होल्ड है। इनसे भाजपा को भारी नुकसान संभावित है। इसी तरह पूर्व भाजपा पार्षद कल्लू तिवारी भी बागी हुए हैं। इनका भी काफी होल्ड है। संभावित नुकसान को देखते हुए पार्टी प्रमुखों ने दोनों को साधना शुरू कर दिया है। यहां से ही भाजपा कार्यकर्ता सीताराम सेन भी बागी हैं, लेकिन इनका प्रभाव कुछ वोटों तक ही सीमित रहेगा। इन्हें भी मनाने का दौर जारी है। वहीं उत्तर विधानसभा से ही सर्व समाज कल्याण पार्टी से अमित खंपरिया भी कुछ सवर्ण वोट ये भी खींच सकते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में भाजपा कुछ ज्यादा ही अलर्ट मोड में नजर आ रही है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - विनय सक्सेना

गणित - चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि यहां से निर्दलीय खड़े हुए प्रत्याशी प्रदीप विश्वकर्मा पूर्व में बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। ये कांग्रेस की थोड़ा-बहुत वोट खींचने की स्थिति में हैं। इससे भाजपा खुश है, लेकिन कांग्रेस ने प्रदीप को लेकर अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र से बाबू विश्वमोहन व पूर्व पार्षद अमरीश मिश्रा भी टिकट मांग रहे थे। इसमें अमरीश मिश्रा का प्रभाव भी काफी अच्छा है। चूंकि इस बार कांग्रेस प्रत्याशी विनय सक्सेना भी पार्षद व नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, इसलिए अमरीश मिश्रा की ओर से बगावत जैसे संकेत नहीं हैं। इससे कांग्रेस प्रत्याशी राहत महसूस कर रहे हैं।
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विधानसभा व क्रमांक - जबलपुर केंट (99)

भाजपा प्रत्याशी - अशोक रोहाणी

गणित - यहां से भाजपा प्रत्याशी को लेकर असंतोष तो है, लेकिन खुलकर कोई मैदान में नहीं है। भाजपा नेता व एमआईसी सदस्य कमलेश अग्रवाल का क्षेत्र में अच्छा होल्ड है। भाजपा ने इन्हें मना व मिलाकर काम करना शुरू कर दिया है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - आलोक मिश्रा

गणित - क्षेत्र में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस में काफी असंतोष रहा। केंट बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चौकसे चिंटू व कांग्रेस नेता चमन श्रीवास्तव नाखुश हैं। कांग्रेस प्रत्याशी व पार्टी प्रमुखों ने अब इन दोनों को मनाना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि यदि ये असंतुष्ट रहे तो कांगे्रस का गणित गड़बड़ा सकता है।

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विधानसभा व क्रमांक - जबलपुर पश्चिम (100)

भाजपा प्रत्याशी - हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू

गणित - इस क्षेत्र बब्बू का काफी विरोध है। यहां से पुराने भाजपा कार्यकर्ता अवतार सिंह ने बब्बू को टिकट दिए जाने से आक्रोशित होकर आत्मदाह का भी प्रयास किया था। हालांकि उनका इतना ज्यादा प्रभाव नहीं माना जाता। क्षेत्र भाजपा के विरोध में और कोई भी खुलकर सामने नहीं आया है। गुटबाजी का कुछ असर है, भाजपा इसे साधने का क्रम शुरू कर दिया है। क्षेत्र में ब्राम्हण व सवर्ण मतदाताओं की संख्या अधिक है, इनमें काफी लोग आरक्षण के मुद्दे को लेकर नाखुश हैं। ये थोड़ा-बहुत वोट काट सकते हैं। इसको लेकर दोनों की पार्टियों ने ब्राम्हणों व सवर्णों पर सेंध लगाना शुरू कर दी है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - तरुण भानोत

गणित - इस क्षेत्र में कांग्रेस के किसी भी बागी प्रत्याशी का नाम सामने नहीं आया है। कारण यह है कि तरुण ने सभी को जोड़ करके रखा है। केवल खतरा एट्रोसिटी एक्ट के बाद उपजे आक्रोश का समझ में आ रहा है। इसे साधने का क्रम शुरू हो गया है।

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विधानसभा व क्रमांक - पनागर (101)

भाजपा प्रत्याशी - सुशील तिवारी इंदु

गणित - यहां भाजपा में अधिक बगावत देखने में आ रही है। यहां से भाजपा से ही विधायक रहे नरेन्द्र त्रिपाठी के अलावा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भारत सिंह यादव ने परचा दाखिल किया है। यहीं से भाजपा की रजनी यादव भी असंतुष्ट हैं। हालांकि नरेन्द्र त्रिपाठी व भारत सिंह यादव का होल्ड अधिक है। भाजपा ने जीत का रास्ता साफ करने के लिए इन्हें मनाना शुरू कर दिया है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - सम्मति सैनी

गणित- यहां से कांग्रेस में भी जबर्दस्त असंतोष है। इस विस क्षेत्र से माइनिंग कारोबारी विनोद श्रीवास्तव ने नामांकन भरा है। वहीं कांग्रेस नेता राजेश पटेल व सत्येन्द्र यादव खासे नाराज हैं। ये कांग्रेस के वोट काट सकते हैं। विनोद श्रीवास्तव का बुढ़ागर, गोसलपुर क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है। इसी कारण से कांग्रेस नेताओं ने खासकर विनोद और राजेश को मनाना शुरू कर दिया है।

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विधानसभा व क्रमांक - सिहोरा (102)

भाजपा प्रत्याशी - नंदनी मरावी

गणित - यहां नंदनी मरावी के विरोध में खुलकर कोई भी बागी सामने नहीं आया है। इसको लेकर भाजपा में काफी राहत है। यहां से बगावत के स्वर नहीं फूटने की वजह सीट का आरक्षित होना माना जा रहा है। आरक्षित वर्ग में भाजपा से कोई दमदार उम्मीदवार सामने नहीं आया है।

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कांग्रेस प्रत्याशी - खिलाड़ी सिंह आर्मो

गणित - नए प्रत्याशी को एकदम उतारे जाने से सिहोरा से कांग्रेस में अधिक बगावत देखी जा रही है। यहां से कांग्रेस की कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री कौशल्या गोंटिया से साथ कांग्रेस नेत्री जमुना मरावी और प्रभा मरावी ने भी पर्चा दाखिल किया है। कौशल्या गोंटिया व जमुना मरावी का अच्छा होल्ड है। पार्टी प्रमुखों ने अब इनकी मान-मनौवल शुरू कर दी है।

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