scriptmp high court big judgement at trust lands in mp | बेशकीमती संस्कृत पाठशाला ट्रस्ट की 72 एकड़ जमीन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, घोषित की निजी भूमि | Patrika News

बेशकीमती संस्कृत पाठशाला ट्रस्ट की 72 एकड़ जमीन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, घोषित की निजी भूमि

बेशकीमती संस्कृत पाठशाला ट्रस्ट की 72 एकड़ जमीन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, घोषित की निजी भूमि

 

जबलपुर

Published: March 04, 2022 10:47:15 am

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में निर्धारित किया कि नरसिंहपुर जिले के पिपरिया बनियाखेड़ा में उमा महेश्वर संस्कृत पाठशाला ट्रस्ट की 72 एकड़ जमीन पर भैयालाल चौधरी व उसके वारिसान का कोई हक नहीं है। अपना सुरक्षित फैसला सुनाते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने उक्त जमीन को ओमप्रकाश मिश्रा की निजी सम्पत्ति घोषित किया। कोर्ट ने 23 सितंबर 2021 को जमीन को बंटवारानामा के आधार पर निजी नाम पर चढ़ाए जाने के बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के आदेश पर लगाई रोक निरस्त कर दी। अधिकारियों को नामांतरण कार्रवाई करने की अनुमति दे दी गई।

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भैयालाल चौधरी व वारिसान का हक नहीं
हाईकोर्ट ने सुनाया सुरक्षित फैसला
नरसिंहपुर जिले का मामला

नरसिंहपुर निवासी रामकिशन पटेल की ओर से याचिका दायर कर बताया गया कि उसके पूर्वज चौधरी भैयालाल द्वारा 1947 में तमलीकनामा के माध्यम से 72 एकड़ जमीन उमा महेश्वर संस्कृत पाठशाला एवं देव शंकरजी मन्दिर को दान में दी गई। दानपत्र में यह प्रावधान रखा गया था कि मंदिर की भूमि किसी भी प्रकार से हस्तांतरित नहीं की जाएगी। इस जमीन से प्राप्त आय का उपयोग संस्कृत की शिक्षा एवं मंदिर के आयोजनों में किया जाएगा। कोर्ट को बताया गया कि मंदिर के सर्वराहकार एवं उनके पुत्रों द्वारा बंटवारामाना तैयार कर नायब तहसीलदार कोर्ट से जमीन अपने नाम दर्ज करवा ली गई थी। पूर्व में इस जमीन पर प्रबंधक के रूप में कलेक्टर जबलपुर का नाम दर्ज था।

कलेक्टर जबलपुर द्वारा तहसीलदार के आदेश का पुनर्विलोकन कर आदेश को निरस्त कर दिया गया। कमिश्नर और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने भी कलेक्टर के आदेश को बहाल रखा। इसके बाद बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने पुनरावलोकन आवेदन पर विचार करने के बाद जमीन को अनावेदकों के नाम पर चढ़ाने का आदेश दे दिया। अनावेदक ओमप्रकाश मिश्रा की ओर से इसका विरोध किया गया। समर्थन में दस्तावेज पेश किए गए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने 1971 में ही ओमप्रकाश मिश्रा के पिता विश्वनाथ मिश्रा को उक्त सम्पत्ति का स्वामी घोषित किया था। इस तथ्य को न्यायालय से छिपाकर स्थगन लिया गया। कोर्ट ने कहा कि उक्तजमीन पर याचिकाकर्ता का नहीं, ओमप्रकाश मिश्रा का स्वामित्व है।

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