बड़ी खबर: बिना शपथपत्र व बयान दर्ज किए आपराधिक परिवाद पर नहीं दर्ज हो सकती एफआइआर

बड़ी खबर: बिना शपथपत्र व बयान दर्ज किए आपराधिक परिवाद पर नहीं दर्ज हो सकती एफआइआर

Premshankar Tiwari | Publish: Sep, 16 2018 03:39:10 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 03:39:11 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

थानेदार के खिलाफ दर्ज एफआइआर निरस्त

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बिना शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए व उसके शपथपत्र के अभाव में जिला अदालत द्वारा एफआइआर दर्ज करने के आदेश नहीं दिए जा सकते। दमोह जिला शिक्षा अधिकारी अजय सिंह, जबेरा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एलएस धुर्वे व जबेरा के तत्कालीन पुलिस थाना प्रभारी मुकेश सिंघई के खिलाफ फर्जीवाड़े के आरोप में जिला अदालत द्वारा एफआइआर दर्ज करने का आदेश निरस्त कर दिया है। जस्टिस एसके पालो की तीनों की ओर से दायर अर्जी का निराकरण करते हुए यह निर्देश दिए।

यह है मामला
अभियोजन के अनुसार दमोह जिले के हर्रई निवासी जितेंद्र भट्ट ने जेएमएफसी दमोह के समक्ष 30 अक्टूबर 2017 को एक आवेदन पेश किया। इसमें कहा गया कि आरटीआइ के तहत उसे जानकारी मिली। इसके अनुसार प्रवीण सिंघई निवासी जबेरा ने मिलीभगत के चलते 2006 में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 की नौकरी हथिया ली थी। 13 जुलाई 2006 को उसकी नियुक्ति के आदेश जारी हुए। प्रवीण का पेश किया गया सारा शालेय अभिलेख फर्जी था। जितेंद्र ने इसकी शिकायत जनपद पंचायत जबेरा के सीइओ से 28 जनवरी 2016 को की। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी जबेरा को उसने 27 अप्रैल, 8 जून, 10 जुलाई 2016 को अभ्यावेदन दिए। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने भी नहीं की कार्रवाई
इस बीच शिकायत की खबर आरोपित प्रवीण को लगी, तो उसने 9 मई 2016 को मुंह पर कपड़ा बांध कर शिकायतकर्ता को कट्टे से गोली मार कर हत्या करने का प्रयास किया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भादंवि की धारा 307 के तहत प्रकरण दर्ज किया। 27 जुलाई 2016 को जितेंद्र ने पुलिस थाना जबेरा के प्रभारी मुकेश सिंघई को सारे घटनाक्रम की लिखित शिकायत की। जेएमएफसी दमोह की अदालत ने इस आवेदन पर 8 नवंबर 2017 को पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दे दिए थे।

गाइडलाइन के खिलाफ
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रशांत दुबे ने कोर्ट को बताया कि दरअसल जिला अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान ही नहीं दर्ज किए। आरोपों के समर्थन में उसका शपथपत्र भी नहीं लिया गया। इनके बिना ही भादंवि की धारा 420,468,471,474, 120 बी, 204, 166 ए के तहत एफआइआर दर्ज करने के आदेश दे दिए गए। कोर्ट ने इस तर्क को मंजूर कर लिया। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का जेएमएफसी का आदेश निरस्त कर दिए। कोर्ट ने जेएमएफसी दमोह को निर्देश दिए कि वे पुन: शिकायतकर्ता के आवेदन की विधिसम्मत तरीके से सुनवाई कर उचित आदेश पारित करें। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के खिलाफ बताते हुए निरस्त करने का आग्रह किया।

 

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