हाईकोर्ट का सख्त आदेश: एक घंटे में उपलब्ध कराओ रेमडेसिविर, 36 घंटे में दो कोरोना टेस्ट रिपोर्ट

हाईकोर्ट का सख्त आदेश: एक घंटे में उपलब्ध कराओ रेमडेसिविर, 36 घंटे में दो कोरोना टेस्ट रिपोर्ट

By: Lalit kostha

Published: 20 Apr 2021, 01:35 PM IST

जबलपुर। कोरोना के इलाज में अनियमितताओं को लेकर स्वत: संज्ञान पर दायर की गई याचिका के साथ इस विषय पर पांच अन्य याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि यद्यपि सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई पर नियंत्रण रख रही है। लेकिन, यह व्यवस्था परेशानी रहित होनी चाहिए। ताकि, इलाज कर रहे डॉक्टरों की मांग और आपूर्ति में एक घंटे से अधिक समय न लगे। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बेंच ने अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दिशानिर्देशों जारी किए। इनके आधार पर सरकार से 10 मई तक पालन रिपोर्ट पेश करने को कहा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा, पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर, संजय वर्मा, शेखर शर्मा ने व सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके कौरव के साथ अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव उपस्थित हुए।

केंद्र सरकार को ऑक्सीजन, रेमडेसिविर आयात के निर्देश-मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे प्रांतों में भी ऑक्सीजन व रेमडेसिविर की कमी है। केंद्र सरकार को चाहिए कि स्टील प्लांट्स व अन्य औद्योगिक संस्थानों से लिक्विड ऑक्सीजन डाइवर्ट की जाए। जरूरत पडऩे पर ऑक्सीजन व रेमडेसिविर का आयात किया जाए। प्रत्येक मरीज को ऑक्सीजन व रेमदेसीविर की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।



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हाईकोर्ट के अहम निर्देश
- प्रतिदिन होने वाले कोरोना टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाए। रिपोर्ट 36 घंटे के भीतर देने की हरसम्भव कोशिश की जाए।
- हर जिला कलेक्टर और सीएमएचओ नियमित अंतराल में सरकारी और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बेड, आईसीयू, रेमडेसिविर, ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में जानकारी ले। जरूरत पर सुविधाएं बढ़ाने के बारे में फैसला लिया जाये।
- आईएमए व मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन से चर्चा कर राज्य सरकार निजी अस्पतालों को कोविड मरीज का इलाज करने से पहले ही तगड़ा एडवांस जमा कराने से रोके।
- सभी निजी व सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेड वेंटिलेटर आईसीयू की जानकारी राज्य सरकार सार्थक पोर्टल में अपडेट करना सुनिश्चित करें।
- सभी निजी और सरकारी अस्पतालों में ब्रांडेड व जेनेरिक रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमतें प्रदर्शित की जाए। सुनिश्चित किया जाए कि तय कीमत से अधिक ना वसूली जाए।
- कलेक्टर व सीएमएचओ निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठक करें। ताकि, मरीजों व अस्पतालों को होने वाली समस्याओं का निदान किया जा सके।
- सरकार कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के टोल फ्री नम्बर 1075 का व्यापक प्रचार प्रसार करे।
- सरकार आइएमए और मध्य प्रदेश नर्सिंग होम्स एसोसिएशन को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर प्लांट लगाने के लिए सॉफ्ट लोन उपलब्ध कराने पर विचार करे।
- बीपीएल कार्डधारी गरीबों का इलाज दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत कराया जाए.निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड व सीजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज करने से मना ना करें।
- इमरजेंसी को देखते हुए राज्य सरकार बीते दो-तीन साल में रिटायर हुए मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ व अधिकारियों को फिर से भर्ती कर सकती है।
- कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीडि़त मरीज का इलाज करने से इंकार ना करे।

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