हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: निजी अस्पतालों में मनमानी वसूली की मरीजों को चुकानी पड़ रही भारी कीमत

राज्य सरकार व कोर्ट मित्र को रेट निर्धारित करने पर विचार करने के लिए कहा

 

By: Lalit kostha

Updated: 20 May 2021, 06:17 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज की दरें निर्धारित करने के मामले में बरती जा रही लापरवाही पर बुधवार को जमकर नाराजगी जताई। ओपन कोर्ट में चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी कर कहा कि सरकार की इस हीलाहवाली का खामियाजा मरीजों को भारी कीमत चुकाकर भुगतना पड़ रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कोर्ट मित्र के साथ विचार कर निर्णय लिया जाए कि किस प्रक्रिया के तहत निजी अस्पतालों में इलाज की दरें तय होंगी। अगली सुनवाई 24 मई को रखी गई।

कोरोना पैकेज पर एतराज-
बुधवार को कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ के तीन अंतरिम आवेदनों पर कोर्ट ने सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट नागरथ ने कोर्ट को बताया कि कोरोना के इलाज की दरें फरवरी 2020 के लिहाज से तय की गई हैं। इनमे इतनी विभिन्नता है कि कोई अस्पताल आईसीयू के 2 हजार रु, कोई 5 हजार तो कोई 25 हजार रु तक वसूल रहा है। निजी अस्पताल अलग अलग मद में चार्ज कर रहे हैं। ऑक्सीजन का शुल्क अलग से लिया जा रहा है म उन्होने कहा कि सरकार को कोरोना पूर्व के निजी अस्पतालों के रेट मालूम ही नही है , जिससे यह निर्धारित हो सके कि निजी अस्पतालों ने कैसे दरें तय कर दीं। उन्होंने निजी अस्पतालों की ओर से जारी कोरोना इलाज पैकेज पर जोरदार आपत्ति जताई। कहा कि फरवरी 2020 में किसी अस्पताल में कोरोना के इलाज की व्यवस्था नही थी। फिर कोरोना के इलाज के पैकेज कैसे तय कर लिए गए, जबकि हाइकोर्ट में सरकार ने अप्रैल 2020 मे कहा था कि फरवरी 2020 के अनुसार 40 फीसदी तक रेट बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। महाधिवक्ता पीके कौरव ने यह बात मानी कि सरकार ने नही, बल्कि निजी अस्पतालों ने स्वनिर्धारण कर रेट तय किए। उन्होंने सभी निजी अस्पतालों में एकसमान रेट तय कर सकने में व्यवहारिक कठिनाइयां बताईं। इस पर कोर्ट ने सरकार को कोर्ट मित्र के साथ विचार कर निर्णय लेने को कहा।

वेन्टीलेटर्स की स्टेटस बताओ-

सीनियर एडवोकेट नागरथ की दूसरी अर्जी सरकारी अस्पतालों में करीब 100 से अधिक वेन्टीलेटर्स बिना उपयोग के बेकार पड़े होने से सम्बंधित थी। कोर्ट ने इस पर सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। सरकार को यह बताने को कहा गया कि जिला अस्पतालों सहित पीएम केयर में प्राप्त वेन्टीलेटर्स का व्योरा पेश कर बताया जाए कि कितने चालू हैं, कितने नही।
जब्त रेमडेसिविर के लिए सीएमएचओ दें आवेदन-

कालाबाजारी के आरोपियों से जब्त किए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन के सम्बंध में भी कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन इंजेक्शन की सुपुर्दगी के लिए सम्बंधित सीएमएचओ न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करें। विचार और परीक्षण के बाद न्यायालय इस पर अपना निर्णय देगा।

Lalit kostha Desk
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