MP में बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण, निजी स्कूलों में पढाई बंद

-निजी स्कूल संचालको के विरुद्ध सख्ती को प्रशासन ने कसी कमर
-नागरिक उपभोक्ता मंच का विरोध जारी, अब कोर्ट जाने की तैयारी

By: Ajay Chaturvedi

Published: 12 Jul 2021, 01:54 PM IST

जबलपुर. MP में बच्चों की शिक्षा पर ग्रहण लग गया है। निजी स्कूल संचालकों के सोमवार से हड़ताल पर जाने से ज्यादातर निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढाई बंद हो गई। हालांकि इन स्कूल संचालकों को सबक सिखाने के लिए प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। उधर नागरि उपभोक्ता मंच भी निजी स्कूल संचालकों से दो-दो हाथ करने को पूरी तरह से तैयार हो गया है। इस संबंध में मंच के लोग कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में हैं।

निजी स्कूल संचालक आठ सूत्री मांग को लेकर आंदोलित हैं। इधर जिला शिक्षा अधिकारी ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिया है जिस पर अभिभावक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों की शिकायत कर सकते हैं।

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बता दें कि स्कूल फीस के मुद्दे पर निजी स्कूल संचालक आंदोलित हैं जबकि सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस साल भी कोई स्कूल फीस नहीं बढ़ाएगा। गैर अनुदानित शासकीय विद्यालयों, सीबीएसई और आईसीएसई तथा अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूल संचालकों को केवल ट्यूशन फीस लेने की छूट दी है। निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ 12 जुलाई से हड़ताल पर जाने की घोषणा पिछले हफ्ते ही की थी। अब सोमवार को ज्यादातर निजी स्कूलों में ऑनलाइन पठन-पाठन ठप हो गया। निजी स्कूल संचालक अब अपनी मांग के समर्थन में जिला शिक्षा अधिकारी और संभाग आयुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है।

स्कूल संचालकों की हड़ताल से निबटने की तैयारी

निजी स्कूल एसोसिएशन की प्रमुख मांगें

-कोरोना की तीसरी लहर की सिर्फ संभावना के आधार पर स्कूल बंद करने का निर्णय तत्काल वापस लें

-निजी स्कूलों को आर्थिक पैकेज, बिजली के अनुसार बिल लेने व पुराने बिल को समायोजित किया जाए

-संपत्ति कर, स्कूल वाहनों का रोड टैक्स, परमिट आदि में राहत प्रदान की जाए

-आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों के एवज में बकाया राशि का भुगतान किया जाए

-केंद्र सरकार के जारी एसओपी के अनुसार 9 से 12वीं के स्कूल को तुंरत खोल जाए

-अभिभावक नियमित फीस न दे तो विलंब शुल्क देने के लिए बाध्य किया जाए

-मप्र शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया था कि बिना टीसी कोई विद्यालय प्रवेश न दें, पर कई विद्यालय ऐसा नहीं कर रहे हैं। उन पर कार्रवाई की जाए

-शिक्षण शुल्क न देने वाले बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट न किया जाए

-सरकार निजी स्कूल संचालकों के साथ मिलकर बैठक करें और निजी स्कूलों के बारे में कोई भी निर्णय में एसोसिएशन को भी शामिल करे

-माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्धता प्राप्त स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण 5 वर्ष के लिए कर दिया जाए

अभिभावक संघ मुखर

कोविड काल में निजी स्कूल संचालकों की मनमानी और फीस बढ़ाने का दबाव बनाने के लिए हड़ताल को लेकर अभिभावक संघ भी मुखर हो चला है। अभिभावकों की ओर से नागरिक उपभोक्ता मंच ने निजी स्कूल एसोसिएशन के खिलाफ दोपहर बाद जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में है।

नागरिक उपभोक्ता मंच जाएगा कोर्ट

इससे पहले स्कूल संचालकों को 48 घंटे का नोटिस भेजकर हड़ताल वापस लेने को कहा था। स्कूल एसोसिएशन को अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखने की बात कही थी। मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे के मुताबिक स्कूल संचालक मनमानी की छूट चाहते हैं। अब इसके खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका लगाने जा रहा हूं।

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