MP: यहां स्कूल पहुंचने सिर पर बैग और हाथ में चप्पल रखते हैं बच्चे

दोनों ही गांव के ग्रामीण बताते हैं कि जब से गांव यहां बसा है तब से पक्की सड़क तो दूर सड़क का नक्शा तक तैयार नही हुआ।

By: Abha Sen

Published: 08 Aug 2016, 12:05 PM IST

गोटेगांव। एक ओर छत्तीसगढ़ के बरपानी गांव में अशिक्षित ग्रामीणों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल डाला और युवतियों ने उन्हें पढ़ाने का जिम्मा ले लिया। वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में ऐसे स्थानों की कमी नही है जहां सरकारी योजनाएं तो खूब हैं लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए यहां के छात्रों को सिर पर बैग और हाथ में चप्पल रखना होता है। झांसीघाट के गांव टीले और अंदर बसे पुरादाफाई गांव में ऐसे दृश्य आमतौर पर देखे जा सकते हैं। 

इन स्थानों पर पूरा रास्ता कीचड़ से सना है। पैदल निकलना भी दूभर, पर बच्चों की मुश्किल ये कि बारिश के बहाने कितने दिन स्कूल से ना जाएं। हालात ये होते हैं कि ना चाहते हुए भी छात्र सिर पर बैग और हाथ में चप्पल रख लेते हैं। स्कूल पहुंचते-पहुंचते प्रतिदिन उनकी यूनिफॉर्म कीचड़ बुरी तरह लग चुका होता है।



दोनों ही गांव के ग्रामीण बताते हैं कि जब से गांव यहां बसा है तब से पक्की सड़क तो दूर सड़क का नक्शा तक तैयार नही हुआ। टीले गांव तक पहुंचने के लिये नक्शे में भी सड़क नहीं है। रास्ते के नाम पर यहां पर सिर्फ एक पगडंडी है जिसके सहारे लोग गांव तक पहुंचते हैं।

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आनेजाने की दिक्कत दूर करने कुछ किसानों ने अपने खेत की जमीन देकर पगडंडी वाले रास्ते को चौड़ा किया है जिससे लोगों का आवागमन हो रहा है। बरसात में यहां से निकलना टेढ़ी खीर है। जरा सी बारिश में यहां की पगडंडी पर सिर्फ कीचड़ ही नजर आता है। गौरतलब है कि दोनों गांवों की जनसंख्या 1000 से ज्यादा है। 
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