election 2018 - भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा- किसको पड़ेगा भारी - भाजपा या कांग्रेस

election 2018 - भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा- किसको पड़ेगा भारी - भाजपा या कांग्रेस

deepak deewan | Publish: Sep, 05 2018 09:23:31 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा

ज्ञानी रजक/प्रभाकर मिश्रा जबलपुर. संस्कारधानी का चर्चित क्षेत्र है केंट विधानसभा। सेना और केंट बोर्ड से जुड़ी यह सीट तब चर्चा में आई, जब लम्बे समय से यहां से विधायक रहे ईश्वरदास रोहाणी विधानसभा अध्यक्ष बने। उनके बाद इस सीट पर 2013 में बेटे अशोक रोहाणी ने भारी मतों से जीत हासिल की। कांग्रेस की सक्रियता को देखते हुए माना जाा रहा है कि इस बार यह सीट बचाने की चुनौती भाजपा के सामने रहेगी।

केंट में सेंध की तैयारी में कांग्रेस

केंट विधानसभा में ऊपरी तौर पर तो भाजपा के अशोक रोहाणी को चुनौती देने की स्थिति में मुख्य विपक्षी कांग्रेस नहीं दिख रही है। मजबूत दावेदार की तलाश में पार्टी के जिम्मेदार कई नाम पर मंथन कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की नजर भाजपा की आंतरिक गुटबाजी पर है। ऐसे में भाजपा संगठन अपने नाराज नेताओं पर नजर रख रहा है।


2013 में वोट
भाजपा - अशोक रोहाणी- 83676
कांग्रेस - चमन श्रीवास्तव- 29935


ये हैं चार मुद्दे
सिविल एरिया का विस्तार, दर्शन सिंह तिराहे से बड़े पत्थर तक सडक़ चौड़ीकरण।

मजबूत दावेदार- भाजपा
अशोक रोहाणी - मौजूदा विधायक।
कमलेश अग्रवाल - एमआईसी सदस्य
रेखा सिंह - एमआईसी सदस्य
एड. सुधीर नायक - सामाजिक कार्यकर्ता
मजबूत दावेदार- कांग्रेस
आलोक मिश्रा - वरिष्ठ नेता
अभिषेक चिंटू चौकसे - केंट बोर्ड उपाध्यक्ष
चमन श्रीवास्तव- पिछली बार के प्रत्याशी
शिव यादव - रांझी के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष
मनीष चंसोरिया - सक्रिय कार्यकर्ता


जातिगत समीकरण
यहां पर जातिगत समीकरण निष्क्रिय है और मुद्दे हावी होते हैं, क्योंकि इसका बड़ा क्षेत्र सेना का है और यहां पर सभी वर्गों की आवाजाही होती रहती है।


चुनौतियां
भाजपा - पार्टी में भितरघात की स्थिति दिख रही है।
कांग्रेस - यहां भी जमकर गुटबाजी सामने आती रहती है। इससे बचने की चुनौती है।


विधायक की परफॉर्मेंस
विकास में सक्रियता दिखी है। लॉ यूनिवर्सिटी के लिए मजबूत तर्क रखे। सिविल एरिया विस्तार में ज्यादा कुछ नहीं कर सके।

सदर के संदीप गुप्ता कहते हैं कि केंट बोर्ड में निर्माण और भर्तियों को लेकर भ्रष्टाचार है। मतदाता सूची से 24 हजार के नाम काट दिए गए हैं।

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