mppsc परीक्षा देनेवाले उम्मीदवारों के लिए हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी

By: deepak deewan

Published: 07 Jun 2018, 08:18 AM IST

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट से एमपीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा २०१७ में बैठने वाले लगभग सौ उम्मीदवारों को निराशा हाथ लगी है। कोर्ट ने ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख बीतने के चलते इन छात्रों को राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की अवकाशकालीन बेंच ने अपना सुरक्षित फैसला सुनाते हुए एमपीपीएससी से सभी याचिकाओं में उठाई गई आपत्तियों पर दो सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है। ताकि २१ जुलाई से आरंभ हो रही मुख्य परीक्षा से पूर्व मामले का निपटारा कि या जा सके।


यह है मामला- गाडरवारा के कृष्ण नारायण मिश्रा सहित अन्य लगभग सौ उम्मीदवारों ने याचिका दायर कर कहा है कि वे सभी प्रारम्भिक परीक्षा 2017 में शामिल हए थे। किंतु प्रश्नपत्र व मॉडल आंसर सीट की गड़बड़ी व अंक गणना के गलत तरीके के चलते वे मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नही हो सके। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ, पुष्पेंद्र दुबे, मनीष वर्मा व विवेक रंजन पांडे ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में करीब 500 छात्रों को मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति हाइकोर्ट दे चुकी है। लेकिन उन छात्रों को ऑनलाइन फॉर्म 31 मई तक दी गई थी। याचिकाकर्ता किन्ही कारणोंवश 31 मई के पहले हाइकोर्ट नही पहुंच सके। तर्क दिया गया कि छग व राजस्थान में भी पीएससी परीक्षा की गड़बड़ी की वजह से वहाँ भी हाइकोर्ट छात्रों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे चुके हैं। समता के सिद्धांत के आधार पर उन्हें भी मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए ।


तारीख बीती, पोर्टल भी बंद
सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि ३१ मई २०१८ की रात बारह बजे तक एमपीपीएससी के पोर्टल पर मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन दाखिल किए गए। सुको के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कट ऑफ तारीख के बाद आवेदन स्वीकार करने के निर्देश नहीं दिए जा सक ते। कोर्ट ने कहा कि मुख्य परीक्षा २१ से २६ जुलाई तक होनी है। लिहाजा इसके पहले मामले का निराकरण करने के लिए एमपीपीएससी अपना पक्ष दो सप्ताह में पेश करे। अगली सुनवाई २५ जून नियत की गई।


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