लिखीं 301 कहानियां, इन्होंने 'मुंशी प्रेमचंद' को कहा था उपन्यास सम्राट

  लिखीं 301 कहानियां, इन्होंने 'मुंशी प्रेमचंद' को कहा था उपन्यास सम्राट
munshi

प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880 - 8 अक्टूबर 1936) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। 

जबलपुर। प्रेमचंद (31 जुलाई, 1880 - 8 अक्टूबर 1936) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाते हैं।

जानकीरमण कॉलेज में मध्यप्रदेश आंचलिक साहित्यकार परिषद और पत्रिका के संयुक्त संयोजन में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि पत्रिका के स्थानीय संपादक गोविंद ठाकरे मौजूद रहे। मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मुख्य रूप से प्रो राजेंद्र ऋषि, डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, डॉ. आनंद सिंह राणा सहित शहर के मूर्धन्य साहित्यकारों ने मुंशी प्रेमचंद के ओजस्वी व्यक्त्वि के बारे में बताया। 

munshi

मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान, गबन और सेवासदन जहां अध्यापन में शामिल किए गए हैं। वहीं इनकी उपन्यासों पर सीरियल और डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। इनकी अधिकतर कहानियोँ मे निम्न व मध्यम वर्ग का चित्रण है। डॉ. कमलकिशोर गोयनका ने प्रेमचंद की संपूर्ण हिंदी-उर्दू कहानी को प्रेमचंद कहानी रचनावली नाम से प्रकाशित कराया है। उनके अनुसार प्रेमचंद ने कुल 301 कहानियां लिखी हैं। 

ये हैं प्रमुख कहानियां
प्रेमचंद की प्रमुख कहानियों में 'पंच परमेश्‍वर', 'गुल्‍ली डंडा', 'दो बैलों की कथा', 'ईदगाह', 'बड़े भाई साहब', 'पूस की रात', 'कफन', 'ठाकुर का कुआँ', 'सद्गति', 'बूढ़ी काकी', 'तावान', 'विध्‍वंस', 'दूध का दाम', 'मंत्र' आदि शामिल हैं।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned