...ताकि धुल सके दाग - गोविंद ठाकरे

deepak deewan

Publish: Oct, 13 2017 02:38:30 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
...ताकि धुल सके दाग - गोविंद ठाकरे

नर्मदा में रेत के अवैध उत्खनन का खेल, जरूरी है हर मामले की तह तक जांच

जबलपुर . सोशल मीडिया में नर्मदा की धार पतली...एक पोस्ट पर दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आईं। किसी ने लिखा-सेवा के नाम पर छल के चलते नर्मदा दुबली हो रही हैं, तो किसी ने अवैध रेत खनन से उसके अस्तित्व को खतरे में बताया। यह सोशल मीडिया पर महज कुछ सक्रिय लोगों की चिंता नहीं है, बल्कि आमजन का माई नर्मदा के प्रति दर्द है, लेकिन लालच में अंधे चंद सियासी और सरकारी हाकिमों के लिए नर्मदा के वजूद से खिलवाड़ महज फायदे का सौैदा है। वे स्वार्थपूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। मंगलवार देर रात बेलखेड़ा के कूड़ा घाट में जो हुआ, वह इसकी एक बानगी है। प्रशासनिक अमले के साथ सत्ताधारी दल की स्थानीय विधायक के पुत्र का दलबल के साथ छापा मारने पहुंचना। इस दौरान वहां भगदड़ में ट्रैक्टर चालक की मौत और गुस्साए ग्रामीणों का टीआई समेत पुलिस महकमे के खिलाफ प्रदर्शन, खनन में लगे डम्पर जब्त करने जैसा और भी बहुत कुछ हुआ। नर्मदा घाट पर यह घटनाक्रम कई बड़े सवाल खड़े करता है। प्रतिबंध के बावजूद वहां किसकी शह पर रेत खनन जारी था? छापामार टीम के साथ किसी जनप्रतिनिधि या उनके रिश्तेदार का मौके पर पहुंचना, निश्चित रूप से प्रशासनिक कार्रवाई में दखलंदाजी ही कहा जाएगा।

 

बनती है गैंगवार जैसी स्थिति
जबलपुर के आसपास नर्मदा के रेत से समृद्ध घाटों पर वर्चस्व को लेकर अक्सर गैंगवार जैसी स्थिति बनी रहती है। इसमें हत्याएं तक हो चुकी हैं। रेत माफिया की ऐसी अनेक करतूतें सामने आ चुकी हैं। रसूख के सामने सरकारी अमला अक्सर लाचार नजर आता है। कुछ महीने पहले नियम-कायदों को ठेंगा दिखाकर घाटों की नाकेबंदी और मनमर्जी के पिट पास जारी करने का खुला खेल चला। हथियारों से लैस गुर्गे इतने चौकस हैं कि कार्रवाई से पहले उन्हें इसकी भनक लग जाती है। दबंगई की ऐसी ही एक घटना के बाद आला अधिकारियों ने घाटों का कई किमी तक पैदल मुआयना किया था। नदी के बीचोंबीच रैम्प बनाकर रेत निकालने वाले कई उपकरण भी जब्त किए थे। उसके बाद से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। यही वजह है कि रेत माफिया फिर से सिर उठाने लगा है।


हो निष्पक्ष जांच और कार्रवाई
आला अधिकारियों को चाहिए कि माफिया के साथ मिलीभगत की जांच कराएं। टीआई सहित जिन अधिकारियों पर पैसे लेकर अवैध खनन कराने का आरोप लगा है, उन्हें भी तत्काल हटाया जाए। साथ ही सतत् निगरानी के प्रभावी तंत्र को सक्रिय रखा जाए। ताकि, गुंडों के हवाले हो चुके नर्मदा के घाट का ये दाग धुल सके। नर्मदा माई की घटती जलराशि को संरक्षित करने और इसके अस्तित्व को चिरस्थाई बनाए रखने की चिंता में सरकारी स्तर पर नर्मदा सेवा यात्रा की जा चुकी है, वृहद स्तर पर पौधरोपण हुआ है, लेकिन इन सत्प्रयासों को धता बता रेत माफिया अब भी जीवनरेखा को घुन की तरह खोखला करने पर आमादा है। क्यों न सरकार ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए? दलगत भावना से ऊपर उठकर माई के लिए जनप्रतिनिधि भी मुस्तैदी से सामने आएं।
govind.thakre@in.patrika.com

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