scriptnational lok adalat 2021 mp, first lok adalat after covid-19 pandemic | 11 दिसम्बर 2021 को फिर बनेगा न्याय क्षेत्र में इतिहास, लगेगी साल की पहली नेशनल लोक अदालत | Patrika News

11 दिसम्बर 2021 को फिर बनेगा न्याय क्षेत्र में इतिहास, लगेगी साल की पहली नेशनल लोक अदालत

दो साल से लाखों मामलों में नहीं हो सका निपटारा

जबलपुर

Updated: December 07, 2021 02:20:57 pm

जबलपुर। कोरोना काल के पूर्व प्रदेश में समझौते योग्य मामलों के निराकरण के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की नेशनल लोक अदालत बेहद सहायक साबित हुई थी। लेकिन बीते दो सालों से प्रदेश में नेशनल लोक अदालत का आयोजन नहीं हो सका। इसके चलते लाखों की संख्या में प्रदेश की अदालतों में बरसों से लम्बित व अदालत पहुंचने के पूर्व प्रिलिटिगेशन स्तर के मामलों का निराकरण नहीं हो सका। जबकि इसके पूर्व पांच वर्षों में ही नेशनल लोक अदालतों के जरिए बावन लाख से अधिक मामलों का समझौते से निराकरण किया जा चुका था। दो साल में पहली बार राज्य भर में 11 दिसम्बर को नेशनल लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसमे भी लाखों मामले निपटाए जाएंगे।

national lok adalat 2021
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Mp High Court Jabalpur
IMAGE CREDIT: patrika

बीते वर्ष एक ही आयोजन
कोरोना के चलते 2020 में एक ही नेशनल लोक अदालत हो सकी और 2021 में भी कमोबेश यही हालात रहे। 2020 में नेशनल लोक अदालत के जरिए राज्य में महज 50157 मामले निपटे। साल में पांच बार आयोजित की जाने वाली नेशनल लोक अदालत 2021 में अभी तक नहीं हो सकी। महामारी से उबरते हुए एक बार फिर प्रदेश भर में 11 दिसम्बर को नेशनल लोक अदालत की तैयारियां जोरों पर हैं। उम्मीद की जा रही है कि एक बार फिर इस आयोजन के जरिए रेकॉर्ड मामलों का समझौते से निराकरण होगा।

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साबित हुई है रामबाण
मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से श्रृंखलाबद्ध रूप से साल में चार बार आयोजित की जाने वाली नेशनल लोक अदालत हाईकोर्ट व जिला अदालतों में लम्बित विवादों के लिए रामबाण साबित हुई है। अदालत पहुंचने के पूर्व मामलों का निराकरण कर अदालतों के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम करने में भी सफलता मिली है। लगातार तीसरे साल व्यवधानकोरोना संकट के चलते सबसे पहले दिसम्बर 2019 में होने वाली नेशनल लोक अदालत बाधित हुई। इसके बाद 2020 में पूरा साल 4 नेशनल लोक अदालतों का आयोजन नहीं किया जा सका। बमुश्किल 12 दिसम्बर 2020 को साल की अंतिम नेशनल लोक अदालत आयोजित हुई। लेकिन इसके लिए ऑनलाइन और भौतिक सुनवाई, दोनों जरियों का इस्तेमाल किया गया। इस तरह बीते दो साल में ही करीब 5 लाख ऐसे मामले नही निपट सके, जिनमे समझौते होने हैं।

इन मामलों में होता है समझौता
अपराधिक शमनीय प्रकरण, लिखित पराक्रम्य अधिनियम की धारा 131 के तहत चेक बाउंस का मामला, बैंक रिकवरी के मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, श्रम विवाद, विद्युत एवं जलकर, वैवाहिक, वित्त सम्बंधी, भूमि अधिग्रहण, पेंशन से सम्बंधित, राजस्व व दीवानी प्रकरण, प्री-लिटिगेशन मामले।

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