श्रद्धालु हुए जागरूक, घर बैठे ही कर रहे ऑनलाइन दर्शन, बढऩे नहीं दे रहे भीड़

चैत्र नवरात्र, देवी मंदिरों में मुख्य पुजारी ही कर रहे अनुष्ठान

By: Sanjay Umrey

Published: 27 Mar 2020, 06:34 PM IST

जबलपुर। नवरात्र में कफ्र्यू के दौरान भक्तों के लिए मंदिरों के गेट बंद हैं। मंदिर के पुजारी ही स्तुति आराधना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में मंदिर पहुंचकर भगवती का दर्शन पूजन करने से वंचित श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दर्शन कराए जा रहे हैं। महाआरती का लाइव और वीडियो के माध्यम से लोग घर बैठे दर्शन कर रहे हैं। संस्कारधानी के प्रमुख मंदिरों में नवरात्र में गुरुवार को यह सुविधा शुरू की गई।
नवरात्र में प्रमुख शक्तिपीठों में नित्य भोर में ही सैकड़ों श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचे थे। देर रात तक मंदिरों में आस्था का सैलाब दिखाई देता था। कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के चलते इस वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है। नवरात्र के दूसरे दिन पुजारियों ने ऑनलाइन दर्शन कराने का प्रयोग शुरू किया। कुछ मंदिर समितियों ने फेसबुक पेज पर आरती लाइव करना शुरू किया तो कुछ मंदिरों के वॉट्सएप ग्रुप में प्रार्थना, श्रृंगार, आरती का वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।
शंकराचार्यमठ सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मंदिर में देश विदेश के श्रद्धालुओं के संकल्प के अनुसार अखंड ज्योति कलश स्थापित की गई है। ब्रह्मचारी चैतन्यानंद के सान्निध्य में पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शक्ति की उपासना कर रहे हैं। मठ के मीडिया प्रभारी मनोज सेन के अनुसार लाइव एवं वीडियो के माध्यम से भक्तों का ऑनलाइन दर्शन कराया जा रहा है। श्रीराम मंदिर मदन महल के वार्षिकोत्सव के अनुष्ठान में पं. रामकुशल पांडेय नित्य भगवान का श्रृंगार व आरती कर रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष गुलशन माखीजा ने बताया कि वे लोग भी भगवान का ऑनलाइन दर्शन ही कर रहे हैं।
बरेला की पहाडिय़ों पर स्थित शारदा मंदिर के पुजारी आशीष शुक्ला ने कहा कि स्थानीय एवं दूर दराज के भक्त भगवती के दर्शन अपने मोबाइल में कर रहे हैं। भानतलैया स्थित बड़ी खेरमाई मंदिर की समिति से जुड़े अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी ने बताया कि वीडियो के माध्यम से भक्तों को दर्शन कराया जा रहा है। सप्तमी, अष्टमी की विशेष महाआरती भी पुजारी ही करेंगे, महाआरती का ऑन लाइन दर्शन कराने की योजना है। जबकि, दो प्रमुख मंदिर समितियों को ऑनलाइन प्रसारण के लिए प्रशासन से अनुमति की प्रतीक्षा है।
तांत्रिक मंदिर में विराजी हैं माता बूढ़ी खेरमाई
मां दुर्गा के विविध रूपों का पूजन नवरात्र के अवसर पर होता है। नौ दिनों में माता के नवरूपों के अलावा अन्य सभी रूपों का पूजन भी इस दौरान किया जाता है। माता के तांत्रिक मंदिरों में सबसे ज्यादा मां बगलामुखी, आसमनी मरही और धूमावती जिन्हें बूढ़ी खेरमाई भी कहा जाता है, के मंदिर प्रसिद्ध हैं। मां धूमावती का हिंडोला जग जाहिर है। इस झूले के नीचे अंगार धधकते रहते हैं और यह गर्म होकर सुर्ख लाल हो जाता है। जिस पर माता का साधक पंडा बैठकर माता को प्रसन्न करता है। मां बूढ़ी खेरमाई का सबसे प्राचीन मंदिर जबलपुर संस्कारधानी में मौजूद है। दूर दराज के गांवों से लोग रोजाना दर्शन पूजन को यहां आते हैं। मान्यता है कि बूढ़ी खेरमाई सभी व्याधियों को दूर करती हैं।
राजा कोकल्यदेव ने बनवाया था मंदिर
चारखम्बा स्थित बूढ़ी खेरमाई मंदिर कल्चुरिकालीन राजा कोकल्यदेव ने बनवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। 1980 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
जवारा जुलूस होता है विशेष आकर्षण
बूढ़ी खेरमाई का जवारा जुलूस सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र होता है। इसमें माता के बाने देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। जानकारी के मुताबिक बाना माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने का प्रतीक है। बूढ़ी खेरमाई के जवारा विसर्जन जुलूस में प्रत्येक वर्ष 700 से 800 भक्त बाना छिदाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इनमें 3 साल के बच्चे से लेकर 50 साल के व्यक्ति शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता का बाना छिदवाने से हर मुराद पूरी हो जाती है, यही वजह है कि साल-दर-साल बाना छिदवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं जिनकी मुराद पूरी हो जाती है वे भी बाना छिदाते हैं।
महिलाओं के दर्शन पर रोक
धर्माचार्यों के अनुसार मां धूमावती का स्वरूप वैधव्य यानी विधवा का स्वरूप माना जाता है। उनका वाहन कौआ है और स्वरूप बेहद विकराल व क्रूर है। देवी यूं तो हर स्वरूप में परमकल्याणी हैं, लेकिन वैधव्य स्वरूप में महिलाओं के लिए उनका दर्शन वर्जित बताया गया है। महिलाएं केवल पीठ की तरफ से उनका पूजन और वंदन कर सकती हैं। इसे शक्ति की पीठ के आराधना से जोडकऱ देखा जाता है। मान्यतानुसार मां धूमावती का प्रताप है कि उनके दरबार पर की गई मनोकामना कभी अधूरी नहीं रहती।

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