Big news: नीट परीक्षा दिए बिना ही प्रवेश पाने वाले छात्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं... हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

जांच में डेंटल के 83 छात्रों का प्रवेश पाया गया था अवैध, याचिकाकर्ता ने कहा - मेडिकल कॉलेजों ने आदेश के तीन माह बाद भी नहीं

By: Premshankar Tiwari

Published: 15 Jan 2018, 02:44 PM IST

जबलपुर। नीट की परीक्षा दिए बगैर ही प्रदेश के डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के फर्जीवाड़े पर सोमवार को एमपी हाईकोर्ट ने एक और प्रहार किया है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित विभाग से पूछा है कि इस तरह गलत तरीके से परीक्षा उत्तीर्ण करने और फिर डेंटल कॉलेजों में बकायदा प्रवेश तक पा लेने वाले छात्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इस तरह के छात्रों के प्रवेश निरस्त क्यों नहीं किए गए? इस संबंध में हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ़्तों में जवाब पेश करने को कहा है

83 छात्र दोषी
उल्लेखनीय है कि व्हीसल ब्लोअर डॉ आनंद राय ने प्रदेश के डेंटल कॉलेजों में प्रवेश में हुए फर्जीवाड़े को लेकर हाईकोर्ट में एक जनयाचिका लगाई है। याचिकाकर्ता ने कहा है डेंटल कॉलेजों में प्रवेश में भारी फर्जीवाड़ा हुआ। कई रसूखदार परिवारों के बच्चों को बिना नीट परीक्षा के ही डेंटल कॉलेजों में प्रवेश दे दिया गया। इन्हें परीक्षा में उत्तीर्ण दर्शा दिया गया। खास बात ये है इसकी जांच में करीब 83 छात्रों को दोषी भी पाया गया। जांच में यह बात साफ हो गई कि प्रदेश के अलग-अलग डेंटल कॉलेजों में इन 83 छात्रों ने नियम विरुद्ध से प्रवेश पाया। जॉच पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने सभी 83 छात्रों के नामांकन रद्द करने निर्देश दिए थे।

एफआईआर की मांग
याचिकाकर्ता डॉ. राव के अनुसार कुलपति ने एमसीआई और डीएमई को लिखकर ये 83 छात्रों के प्रवेश तत्काल प्रभाव से रद्द करने को कहा था, लेकिन इस आदेश के तीन माह बीत जाने के बाद भी किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में याचिकाकर्ता ने कोर्ट की शरण ली। माननीय न्यायालय से सभी 83 छात्रों के दाखिलो को निरस्त करने और सभी पर एफआईआर करने की मांग की।

डीएमई को भी नोटिस
याचिकाकर्ता डॉ. राव की याचिका पर कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार व डीएमई समेत अन्य को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जांच और दोष सिद्ध होने के बाद भी इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? छात्रों के प्रवेश निरस्त क्यों नहीं किए गए? फर्जीवाड़ा करने वालों पर एफआईआर के मसले को कोर्ट ने अभी जांच में रखा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

Premshankar Tiwari Desk
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