कोर्ट की अवमानना करना पड़ेगा भारी, अधिकारियों की मनमानी व नाफरमानी पर कसेगा शिकंजा

कोर्ट की अवमानना करना पड़ेगा भारी,  अधिकारियों की मनमानी व नाफरमानी पर कसेगा शिकंजा

Abhishek Dixit | Publish: Mar, 17 2019 02:50:50 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हाईकोर्ट के आदेश-निर्देश का पालन करने में हो रही हीलाहवाली

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने 24 नवम्बर 2017 को एक मामले में कहा था कि राज्य के अधिकारियों की मनमानी व नाफरमानी बढ़ती जा रही है। वह दिन दूर नहीं है, जब आदेश का पालन न करने पर कोर्ट को ही सम्बंधित अधिकारी को दंड देना होगा।

हाईकोर्ट की यह सख्ती इस साल भी बरकरार है। बीते छह माह में हाईकोर्ट कई बड़े अधिकारियों को उनकी कार्यप्रणाली को लेकर फटकार चुकी है। कोर्ट ने कई अफसरों को बुलाकर उनसे स्पष्टीकरण मांगे। कानूनविदों का मानना है कि इस सख्ती से सरकारी कार्यप्रणाली मेंं न्यायपालिका के प्रति सम्मान बढ़ेगा। आदेशों का पालन होने से आमजन का फायदा होगा।

दोषियों पर क्यों नहीं हुई कारवाई
एक जनहित याचिका में कहा गया कि 2016 में बांधवगढ़ के कुछ गांवों का विस्थापन किया गया था। इसमें एक दर्जन से अधिक लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा वितरण किया गया।

शिकायत पर फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ ने 29 मार्च 2017 को अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि मुआवजा वितरण में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने बैंक को पत्र लिखकर राशि का वितरण नहीं करने की अनुशंसा भी की थी। इसके बावजूद दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई। 22 फरवरी 2019 को हाईकोर्ट ने उमरिया कलेक्टर अमरपाल सिंह और एसपी डॉ. असित यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किए।

आवारा जानवरों पर कार्रवाई नहीं, कलेक्टर को बुलाया
आदेश की नाफरमानी के चलते ही जबलपुर कलेक्टर छवि भारद्वाज 24 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट ने बुलाया। कोर्ट के निर्देश के बावजूद कलेक्टर ने सड़कों पर आवारा जानवरों पर कार्यवाही के संबंध में न हलफनामा पेश किया और न ही याचिका की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं थीं। कलेक्टर ने हाईकोर्ट में हाजिर होकर क्षमा मांगते हुए हलफनामा दिया। कहा, प्रशासन आवारा जानवरों के खिलाफ कार्रवाई में नगर निगम को पूरा सहयोग देकर समस्या का निदान कराएंगी। लेकिन अभी भी स्थिति जस की तस है।

अफसर बताएं, अब तक क्यों नहीं बनी सड़क
मैहर तहसील निवासी रिटायर्ड शिक्षक देवराज भट्ट ने अवमानना याचिका दायर कर कहा कि मैहर के समीप बरेठी से करसारा होकर बठिया तक 5 किमी लंबी सड़क निर्माण की मंजूरी 2006 में मिल गई। राशि भी स्वीकृत हुई। फिर भी इसका निर्माण नहीं हुआ। 2016 में राज्य सरकार ने इसका निर्माण जल्द से जल्द करने का अभिवचन हाईकोर्ट को दिया था। फिर भी निर्माण आरंभ नहीं हुआ । इस नाफरमानी के लिए 2 फरवरी 2019 को हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग पीएस मो. सुलेमान, पूर्व पीएस मनीष रस्तोगी, सतना कलेक्टर सतेंद्र सिंह व अन्य को अवमानना नोटिस जारी किया।

समयसीमा के बाद भी क्यों नहीं आदेश का पालन
सिवनी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका विमला बरमैया ने याचिका में कहा कि 31 मई 2018 को वे सेवानिवृत्त हुईं। 30 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी तृतीय क्रमोन्नति नहीं दी गई । इसके खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने 60 दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए। समयसीमा में कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश की नाफरमानी को आड़े हाथों लिया। आयुक्त आदिवासी विकास दीपाली रस्तोगी, कलेक्टर सिवनी प्रवीण कुमार, सहायक आयुक्त सतेन्द्र सिंह मरकाम, संयुक्त संचालक जबलपुर डॉ. आरके मिश्रा व जिला पेंशन अधिकारी सिवनी उज्ज्वल कश्यप को अवमानना नोटिस जारी किए गए।

अफसरों को नोटिस
आदेश के खिलाफ डीज़ल ऑटो चलाए जाने और उन्हें बदस्तूर परमिट दिए जाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई । कोर्ट ने 28 जनवरी को प्रदेश के परिवहन सचिव सहित जबलपुर कलेक्टर छवि भारद्वाज, एसपी अमित सिंह और आरटीओ संतोष पाल को नाम से नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर उन्होने हाईकोर्ट के आदेश की नाफरमानी क्यों की। दरअसल प्रदूषण के संबंध में याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मार्च 2016 में डीज़ल ऑटो रिक्शा पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। लेकिन दो साल बीतने के बाद भी डीज़ल ऑटो पर रोक नहीं लगाई गई।

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