अमृत जैसा पानी नालियों में मिलते हुए पहुंचता है घर तक

जबलपुर में बदइंतजामी क चलते पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं

 

By: shyam bihari

Published: 07 Mar 2020, 08:10 PM IST

जबलपुर। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के दावों के बीच जबलपुर शहर में कई जगह फूटी पाइप लाइन से लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंच रहा है। कुछ बस्तियों में गंदी नालियों के बीच से पाइप लाइन गुजर रही है। पुराने पाइप में सुराग और फूटे पाइप के जरिए जल शोधन संयंत्र से छनकर आ रहा पानी भी दूषित हो रहा है। गंदे पानी को पीकर लोग अभी से बीमार पड़ रहे हैं। गर्मी की दस्तक के बीच बस्तियों से उल्टी-दस्त और पेट में दर्द की शिकायत लेकर इक्का-दुक्का मरीज पहुंचना शुरू हो गए हैं। कुछ मरीजों में एलर्जिक इन्फेक्शन भी सामने आया है। अभी से पाइप लाइनों को दुरुस्त कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होने पर तापमान बढऩे के साथ ही मरीजों की संख्या बढऩे का खतरा है। लोगों की सेहत प्रभावित होने की आशंका है।
ऐसी है स्थिति
उजारपुरवा बस्ती में सड़क किनारे एक सार्वजनिक नल बिल्कुल नाली के मुहाने पर है। यहां तक पुरानी पाइप लाइन कीचड़ से गुजरकर पहुंच रही है। सूपाताल के पास सड़क खोदने के दौरान पेयजल पाइन क्षतिग्रस्त हो गई। फूटे पाइप से पानी व्यर्थ बह रहा है। इसी जगह से पाइप लाइन में गंदा पानी मिल रहा है। टेलीग्राफ नंबर-1 के पास नाली के अंदर तक पेयजल का पाइपलाइन लगा है। कुछ ही दूरी में नाली के अंदर से कई जगह पेयजल के कनेक्शन भी पाइप लाइन से दिए हैं। शहर में कुछ बस्तियों में गर्मी के मौसम हर वर्ष आंत्रशोध फैलता है। निचली बस्तियों में घर-घर में लोग दूषित जल पीकर बीमार होते हैं। उसके बावजूद इन क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइन दुर्दशा का शिकार है। पानी की पाइप नालियों के अंदर से बिछा दी गई है। साफ-सफाई और कनेक्शन दिए जोन से कई जगह से सुराग होकर गंदा पानी पाइप लाइन में मिल रहा है। सड़क और सीवर लाइन की खुदाई के काम में भी कई जगह पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है, जिससे धूल और गंदगी रिसकर पानी में मिल रही है। गढ़ा की बस्तियां, उजारपुरवा, मोहनिया, लालमाटी, करियापाथर, परसवाड़ा, कठौंदा, चेरीताल रांझी की कुछ बस्तियां और तिलहरी में विस्थापितों की बस्ती सहित कई जगहों पर मौसमी बीमारी दूषित पानी से फैलती रही है।
इस तरह फैलती है बीमारी
गर्मी महसूस होने के साथ ही शहर में जगह-जगह ठंडा, लस्सी, जूस सहित शीतल पेय बेचने वालों की दुकानें बढ़ जाती है। इसमें भी पाइप लाइन से मिलने वाले दूषित पेयजल का उपयोग होता है। चाट-फुल्की सहित ठेलों में बिकने वाली सामग्री में भी दूषित जल के प्रयोग से बीमारी का खतरा रहता है। इन सामग्रियों को बेचने वाले कई लोग बस्ती क्षेत्रों में निवास करते है। ऐसे में दूषित जल और उससे निर्मित अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होने का असर सेवन करने वाले दूसरे लोगों पर पडऩे की आशंका रहती है। बाहर का खाना खाने के बाद पेट में दर्द, मितली, सिर चकराने और उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।

shyam bihari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned