negligence : थानों में रिकॉर्ड नहीं, स्कूल वाहनों के चालक पुलिस नियंत्रण से बाहर

negligence : थानों में रिकॉर्ड नहीं, स्कूल वाहनों के चालक पुलिस नियंत्रण से बाहर
Ignoring the rules

Tarunendra Singh Chauhan | Updated: 30 Jun 2019, 01:54:29 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

रीवा में बच्चों को वैन चालक द्वारा अगवा किए जाने की घटना से चिंता में अभिभावक

जबलपुर . रीवा में वैन चालक की ओर से 14 स्कूली छात्रों को अगवा किए जाने की घटना सामने आने के बाद से यहां के भी Parents चिंता में हैं। शहर में लगभग 95 हजार से अधिक छोटे बच्चे विभिन्न वाहनों से स्कूल आते-जाते हैं। इन वाहनों के चालक, परिचालक का न तो पुलिस सत्यापन कराया गया है और न ही कोई record स्कूल, पुलिस, परिवहन या जिला प्रशासन के पास है। इन वाहन चालकों में कौन अपराधी प्रवृत्ति का है और उनका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड क्या है, इससे अभिभावक भी अनजान हैं। ऐसे में बच्चों के सकुशल स्कूल से घर वापसी तक Parents को चिंता लगी रहती है।

परिवहन विभाग में सिर्फ स्कूल वाहन के तौर पर 550 बसें और लगभग 127 ट्रैवलर व अन्य वाहन पंजीकृत हैं। वैन प्रतिबंधित होने के बाद भी शहर में धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। अधिकतर वैन गैस किट से चल रही हैं। पुलिस-प्रशासन और परिवहन विभाग की नाक के नीचे वैन शहर में संचालित हैं। फिर भी सिर्फ दिखावे की कार्रवाई हो रही है। इनके संचालन पर रोक लगाने में सारी एजेंसियां नाकाम साबित हो रही हैं।

यह है स्थिति
पंजीकृत स्कूल वाहन-550 बस- बच्चों की संख्या-19250
ट्रैवलर व अन्य वाहन-127- बच्चों की संख्या-2794
अवैध तरीके से संचालित वैन-2500- बच्चों की संख्या-30,000
स्कूल ऑटो-4000- बच्चों की संख्या-40,000
साइकिल रिक्शा-500- बच्चों की संख्या-2500

इन नियमों का उल्लंघन
-कोई भी वैन टैक्सी में पंजीकृत नहीं
-वैन चारों तरफ से कवर होती है और गैस किट से संचालित की जा रही हैं
-वैन का पंजीकरण स्कूल वाहन के तौर पर प्रतिबंधित
-प्राइवेट टैक्सी में भी परिवार के बच्चे पांच से सात की सीटिंग क्षमता के अनुसार ही बैठ सकते हैं
-किसी भी चालक का पुलिस सत्यापन नहीं

सबसे अधिक नियम तोड़ रहे ऑटो चालक
पुलिस record पर ही गौर करें तो बड़ी संख्या में ऑटो चलाने वाले पेशेवर व कुशल चालक नहीं हैं। अधिकतर नशा व चोरी करते हैं। ये चालकों के भरोसे आठ से दस बच्चों की सुरक्षा पर हर पल खतरा मंडराता रहता है। पूर्व में कई ऐसी घटनाएं सामने भी आ चुकी हैं, जब चालक की ओर से छेड़छाड़ व आपत्तिजनक व्यवहार बच्चों के साथ किया गया।

इन नियमों का उल्लंघन
-ऑटो में 12 वर्ष से कम के पांच तो अधिक होने पर तीन छात्र बैठ सकते हैं
-दोनों तरफ जाली लगी हो, बैग के लिए कैरियर लगा हो
-चालक सीट पर प्रतिबंध के बावजूद बच्चों को बिठाकर चल रहे हैं

बस चालकों-परिचालक का भी सत्यापन नहीं
स्कूल बस के चालक-परिचालक का भी पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया है। अर्सें से उनकी आंखों की जांच तक नहीं करायी गई है। बस में स्कूल का कोई अध्यापक होने की शर्त का भी पालन नहीं किया जा रहा है। बालिकाओं वाले स्कूल बस में महिला टीचर की अनिर्वायता का भी पालन नहीं।

इन नियमों का नहीं पालन
-फस्र्ट एंड बॉक्स व अग्निशमन यंत्र नहीं
-स्पीड गवर्नर इंजन से जुड़ा नहीं
-अधिकतर में सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस नहीं लगे हैं
-आधे से अधिक बसें 10 से 15 वर्ष पुरानी हैं

जबलपुर सहित जोन के सभी पुलिस अधिक्षकों को स्कूल वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का शतप्रतिशत पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रबंधन संग बैठक कर लें। सभी चालकों का पुलिस सत्यापन कराकर स्कूल प्रबंधन अपने पास रिकॉर्ड रखेगा। थानास्तर पर वाहनों की चैकिंग होगी।
विवेक शर्मा, आइजी, जबलपुर जोन

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