ओएफके के बमों ने आतंकवादियों पर बरपाया कहर

ओएफके के बमों ने आतंकवादियों पर बरपाया कहर
Ofk bombs has created havoc on terrorists

Gyani Prasad | Publish: Feb, 27 2019 12:30:49 PM (IST) | Updated: Feb, 27 2019 12:30:50 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

वायुसेना ने किया थाउजेंड पाउंडर बम का इस्तेमाल

 

ज्ञानी रजक @ जबलपुर
बालाकोट में पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौत की नींद सुलाने में जबलपुर की बड़ी भूमिका सामने आई। वायुसेना ने जिन थाउजेंड पाउंडर बमों का इस्तेमाल हमले में किया, उनका उत्पादन आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) होता है। यह इतना खतरनाक है कि जहां गिरे, वहां धरती थर्रा जाती है। लोग भूकंप महसूस करते हैं। न केवल उस स्थान पर 6 मीटर से गहरा गड्ढा हो जाता है बल्कि आसपास का आधा किलोमीटर में तबाह हो जाता है।

पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए देश की वायुसेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मंगलवार तडक़े हमला कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। इसमें सैकड़ों आतंकवादी भी मारे गए। जिन इलाकों में आतंकवादियों का ठिकाना है, पहाड़ी एवं घना जंगल वाला है। ऐसे में पैदल सेना के लिए वहां हमला करना सरल नहीं होता। इसलिए वायुसेना ने उन पर हमला कर जवाबी कार्रवाई की। इसमें ओएफके के बमों का इस्तेमाल ने यहां के कर्मचारियों का सीना चौड़ा कर दिया है। वह फक्र महसूस कर रहे हैं।

प्रमुख उत्पादों में शामिल
1000 एलबीएस (हाई एक्प्लोसिव) ओएफके और वायु सेना के सबसे घातक हथियारों में शामिल है। इसका उत्पादन एक दशक से ज्यादा समय से किया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने बताया कि 450 किलो से ज्यादा वजन के इस विध्वंसक बम में 250 से 300 किलो बारूद भरा होता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी मारक क्षमता कितनी होगी। जिस जगह पर यह गिरता है वह बंजर ही हो जाती है।

वायुसेना की बड़ी ताकत
न केवल थाउजेंड पाउंडर बम बल्कि इसी श्रृंखला के दूसरे बमों का उत्पादन भी फैक्ट्री में होता है। इसमें प्रमुख रूप से 250 किलोग्राम, 100-120 किलोग्राम एरियल बम, 450 किलो बम आदि प्रमुख हैं। यानि वायुसेना की बड़ी ताकत के रूप में आयुध निर्माणी खमरिया बना रहता है। सूत्रों का कहना है कि सभी प्रकार की श्रृंखलाओं के 10 हजार से ज्यादा बमों का उत्पादन यहां किया जाता है।

यह हैं खासियत
- बंकर, इमारत व रनवे को उड़ाने में सक्षम।
- आधा किलोमीटर की दूरी तक होती है तबाही।
- गिरने पर होता है छह मीटर गहरा गड्ढा।
- 450 किलो से ज्यादा वजन पूरे बम का।
- 7 फीट से अधिक है बम की लम्बाई।
- 15 हजार मी. ऊंचाई से दागा जा सकता है।
- 300 किलो वजन से अधिक टीएनटी।

देश की सशस्त्र सेनाओं के हाथ मजबूत करने में आयुध निर्माणियों की बड़ी भूमिका है। वायुसेना के लिए आयुध निर्माणी खमरिया थाउजेंड पाउंडर और एरियल बम के अलावा दूसरे बमों का उत्पादन करती है। अभी यह कहना मुश्किल है कि इनमें से कौन से बम का इस्तेमाल पीओके में किया गया।

एके अग्रवाल, वरिष्ठ महाप्रबंधक ओएफके

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