जिंदगी की जंग में मिटी हाथों की लकीरें, आधार कार्ड ने निवाले के लिए कर दिया मोहताज

जिंदगी की जंग में मिटी हाथों की लकीरें, आधार कार्ड ने निवाले के लिए कर दिया मोहताज

amaresh singh | Publish: May, 18 2018 12:44:35 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

आधार नहीं बनने से वृद्धा को दो माह से पेंशन नहीं मिल रही,जिससे न सिर्फ वृद्धा बल्कि पूरा परिवार परेशान है।

कटनी। आंखों से 20 साल पहले गायब हुई रोशनी सुध-बुध भी खोई-खोई सी, सोच और समझ भी गायब, लगभग हर समय अचेतावस्था पुत्र की गोद में कांपती वृद्धा। यह नजारा था जिलाधीश कार्यालय का। असमय सिर से पति का साया छिन जाना। जिंदगी में वज्राघात के बाद किसी तरह बेटों के सहारे जी रही शारीरिक रूप से जीर्ण-शीर्ण महिला की उम्र के चौथे पड़ाव में आधार कार्ड ने परेशानी बढ़ा दी है। आधार नहीं बनने से वृद्धा को दो माह से पेंशन नहीं मिल रही,जिससे न सिर्फ वृद्धा बल्कि पूरा परिवार परेशान है।

पति की मौत कई साल पहले हो चुकी है
जानकारी के अनुसार रामबाई वर्मन पति रिक्खीलाल 70 कटंगीकला के पति की मौत कई साल पहले हो चुकी है। पति रेलवे में संदेश वाहक थे। हर माह 10 हजार 500 रुपए पेंशन मिलता है। जिससे उसकी व उसके बेटे की रोजी रोटी चलती है। जिंदगी की जंग में वृद्धा की हाथ की लकीरे मिट गई है। 20 साल पहले ही उसे दिखना बंद हो गया है। पति की पेंशन व बेटे के सहारे जिंदगी काट रही वृद्धा को तेज धूप में परेशान होना पड़ा। इस उम्र में आधार कार्ड न पाने कारण दो माह से पेंशन नहीं मिल रही है।


गोद में लेकर पहुंचा बेटा
बुधवार को बेटा रवि कुमार बर्मन किसी तरह गांव से बीमार मां को कलेक्ट्रेट आधार कार्ड बनवाने के लिए लेकर पहुंचा। गोद में कलेक्ट्रेट गेट से लेकर आधार केंद्र तक लेकर गया। कई घंटे तक आधार कार्ड के लिए वह इंतजार करता रहा। रवि का कहना था कि पूर्व में वह कई बार आधार कार्ड बनवाने आया है। उसे कह दिया जाता था कि दिव्यांग का कार्ड नहीं बनता। अब उनका भी बनने लगा है। तब वह मां को केंद्र लेकर आया है। आधार कार्ड नहीं होने से मां की पेंशन रुक कई है। जिससे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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