36 हजार कार्डधारी, 87 हजार लाभार्थी और डिस्पेंसरी पांच

36 हजार कार्डधारी, 87 हजार लाभार्थी और डिस्पेंसरी पांच
patient feel trouble in dispensary

Gyani Prasad | Publish: Apr, 12 2019 01:37:39 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

जन एजेंडा: छठवीं को मंजूरी लेकिन जगह नहीं दिला पाए जनप्रतिनिधि

 

जबलपुर.सुबह सात से दोपहर एक बजे डॉक्टर कक्ष के सामने लंबी लाइन। इलाज का नम्बर आता है या नहीं तय नहीं होता। इलाज मिल जाए तो पूरी दवा मिल पाएंगी, यह पक्का नहीं होता। ऐसे में दूर-दराज से आए मरीजों को घर लौटना पड़ता है। इसमें 80 फीसदी से मरीज बुजुर्ग होते है। ऐसे में उनका मर्ज दोगुना हो जाता है। यह स्थिति है शहर की सीजीएचएस डिस्पेंसरियों की। इनमें मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। डिस्पेंसरी, डॉक्टर और स्टाफ सभी कम है। इलाज के लिए आने वाले मरीज खींझते हैं। वह कई बार डिस्पेंसरी और सुविधाएं बढ़ाने के लिए कह चुके हैं लेकिन सुनता कोई नहीं है।


यादव कॉलोनी में सीजीएचएस डिस्पेंसरी नम्बर दो में हालत बुरे थे। यहां बैठे मरीज यही सोच रहे थे कि डॉक्टर चला जाए इससे पहले उनका नम्बर आ जाए। अगर डॉक्टर देख लेता है तो दवा के लिए न भटकाया जाए। क्योंकि ज्यादातर दवाइयां लोकल परचेज मद में डाल दी जाती है। उन्हें मिलने में दो से तीन दिन का वक्त लग जाता है। अपने इलाज के लिए आए नारायण प्रसाद श्रीवास्तव कहते हैं कि चार डाक्टर हैं। उसमें सभी आएं यह तय नहीं रहता। सतेन्द्र जैन, वीके हरिराम ने बताय कि बैठने की व्यवस्था नहीं है। गरमी में शेड तपता है। हम बुजुर्ग हैं। इतनी गरमी कैसे सहन कर सकते हैं।

बच्चों को छोडकऱ घर से आओ
महिला मरीज जयमाला ढगे और कमला बाई का कहना है कि पर्याप्त डिस्पेंसरी और चिकित्सक नहीं होने के कारण उन्हें दूर दराज से इलाज के लिए आना पड़ता है। घर में बच्चों को छोडकऱ आओ। लंबी लाइन लगती है। एक से दो घंटे में नम्बर आता है।इसलिए डिस्पेंसरी की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। जितेन्द वर्मा और कालूराम पटेल का कहना थ कि चिकित्सक जो दवाएं लिखते हैं, उनमें से ज्यादातर लोकल परचेस वाली होती है। वह मिलने में दो से चार दिन लग जाते हैं। ऐसे में मर्ज कम नहीं होता, बढ़ जरुर जाता है। लगभग सभी डिस्पेंसरी किराए के भवनों में हैं। ऐसे में इनमें बुनियादी सुविधाएं नहींं मिल पाती हैं।

अलग-अलग संस्थानों के मरीज

जबलपुर शहर में बड़ी संख्या में सीजीएचएस सेवा का लाभ लेने वाले लोग हैं। यहां चार आयुध निर्माणिया, सेन्ट्रल ऑर्डनेसं डिपो, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप और सैन्य और असैन्य इकाइयां हैं। सेवानिवृत्ति के उपरांत इलाज के लिए कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सीजीएचएच कार्ड पर निर्भर रहता पड़ता है। वर्तमान में पांच डिस्पेंसरी हैं। इसमें 36 हजार 313 कार्डधारी हैं तो लाभार्थियों की संख्या करीब 87 हजार है।

पांच हजार से ज्यादा कार्ड पर डिस्पेंसरी

नियम तो यह कहता है कि यदि किसी डिस्पेंसरी में पांच हजार से ज्यादा कार्ड हुए तो फिर नई डिस्पेंसरी खुलनी चाहिए। दूसरे शहरों की बात करें तो वहां पर्याप्त डिस्पेंसरी हैं लेकिन जबलपुर में यह बड़ी समस्या है। सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा कहते हैं कि सांसदों से इस समस्या को अवगत करवा चुके हैं लेकिन इसका समाधान नहीं होता। भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस तिवारी कहते हैं कि बड़ी मुश्किल से छठवीं डिस्पेंसरी स्वीकृत कराई लेकिन उसके लिए जगह नहीं मिल पा रही है। हम चाहते हैं कि कम से कम दस डिस्पेंसरी हों।

देश के प्रमुख शहरों में डिस्पेंसरी की स्थिति

शहर डिस्पेंसरी कार्डधारी लाभार्थी
बनारस 02 89 222
लखनऊ 10 22337 70822
कानपुर 09 31908 85038
अहमदाबाद 14 19942 60188
चेन्नई 20 44174 116337
हैदराबाद 19 67668 188421
जबलपुर 05 36313 86734

शहर की डिस्पेंसरी की स्थिति
डिस्पेंसरी क्रमांक कार्ड संख्या लाभार्थी संख्या
एक 7409 17076
दो 9874 23626
तीन 11684 28138
चार 4991 12762
पांच 2265 5132

 

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