oxygen supply failure: अस्पताल वाले बोले ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर आएं, अब तभी करेंगे भर्ती

अस्पताल वाले बोले ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर आएं, अब तभी करेंगे भर्ती

By: Lalit kostha

Updated: 16 Apr 2021, 02:20 PM IST

जबलपुर। शहर में ऑक्सीजन लिक्तिड प्लांट में खराबी से गम्भीर मरीजों की जान पर बन आई। प्रशासन की तमाम कवायद के बाद भी गुरुवार दोपहर बाद तक ऑक्सीजन सिलेंडर की किल्लत बनी रही। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में सिलेंडर नहीं मिले। इसके चलते ज्यादातर अस्पतालों ने गम्भीर मरीजों को भर्ती करने मना कर दिया। कुछ कोरोना गम्भीर कोरोना संक्रमित को आइसीयू बेड नहीं मिले। अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते संक्रमित की मौत हुई। बिगड़ते हालात के बीच गम्भीर कोरोना मरीजों को लेकर पहुंचे लोगों को अस्पताल ने ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आने पर भर्ती करने की शर्त रख दी। निजी के बाद सरकारी अस्पतालों में कोविड बिस्तर भर जाने से नए कोरोना मरीजों के लिए बिस्तर का संकट बन गया है।

मेडिकल अस्पताल भी ओवर फ्लो
कोरोना संक्रमित लगातार बढऩे से निजी अस्पताल तीन दिन पहले ही फुल हो चुके है। विक्टोरिया अस्पताल के बाद मनमोहन नगर और ज्ञानोदय कोविड केयर सेंटर में लगभग बिस्तर भर चुके है। सम्भाग के सबसे बड़े मेडिकल अस्पताल में गुरुवार को क्षमता से ज्यादा कोरोना मरीज हो गए। इसके बाद मेडिकल अस्पताल मेंं भी मरीजों को बिस्तर नहीं मिल रहा है। यहां कोविड आइसोलेशन के लिए 744 बिस्तर थे। गुरुवार तक 840 भर्ती हो चुके थे। अस्पतालों में बिस्तर खाली नहीं होने से प्राइवेट अस्पतालों की पार्किंग में कार में मरीज घंटों बिस्तर के इंतजार में खड़े रह रहे हैं। कुछ निजी अस्पतालों की पार्किंग में परिजन कोरोना मरीज लेकर पूरी रात खड़े रहे। ताकि, बिस्तर खाली होने पर उन्हें वार्ड में जगह मिल सकें।

 

530 oxygen cylinders are used daily in Bhilwara

जरूरत से कम मिल रहे ऑक्सीजन सिलेंडर
- विक्टोरिया अस्पताल में लगभग दो सौ कोरोना मरीज भर्ती है। इसमें 90 प्रतिशत मरीज ऑक्सीजन पर है। 140 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी। दोपहर बाद तक 40 ऑक्सीजन सिलेंडर ही मिले थे।
- आगा चौक स्थित एक निजी अस्पताल में 104 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम में है। गुरुवार सुबह ऑक्सीजन कम पड़ गई। मरीजों की हालत बिगडऩे पर दूसरे अस्पताल से 10 सिलेंडर लाकर मरीजों की जान बचाई गई।
- नेपियर टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में कई मरीज लाइफ सपोर्ट सिस्टम है। यहां 84 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत थी। गुरुवार की दोपहर तक अस्पताल को 30 सिलेंडर ही उपलब्ध हो सकें है।
- मेडिकल में कोविड आइसोलेशन की तीन यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर उपयोग किए जा रहे है। 175 मरीज ऑक्सीजन सिस्टम पर है। जरुरत के आधे सिलेंडर ही गुरुवार दोपहर तक मिले थे।


मरीजों की परेशानी, दलाली बढ़ी
केस:1- ऑक्सीजन बेड नहीं मिलने से मौत
रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में वाणिज्य विभाग के कर्मी को कोरोना संक्रमित होने पर रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। हालत गम्भीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। लेकिन, ऑक्सीजन बेड नहीं मिला। वापस रेलवे अस्पताल में भर्ती किया गया। लाइफ सपोर्ट सिस्टम नहीं मिलने से गुरुवार को रेल कर्मी की उपचार के दौरान मौत हो गई।

केस:2- 1 लाख जमा करने पर भी बेड नहीं
सतना से कोरोना संक्रमित 33 वर्षीय युवक को सांस लेने में समस्या होने पर परिजन बुधवार को शहर लेकर आए। आगा चौक स्थित एक निजी अस्पताल ने फोन में युवक को भर्ती करने की सहमति दी थी। लेकिन जब मरीज पहुंचा, तो ऑक्सीजन सिलेंडर लाने पर उपचार करने की शर्त रख दी। राइट टाउन स्थित एक अस्पताल एक लाख रुपए मांगने के बाद ऑक्सीजन बेड ना होने कहकर लौटा दिया। देर रात मेडिकल में मरीज को बिस्तर मिला।

केस:3- बिस्तर दिलाने वसूल लिए 15 हजार
ऑक्सीजन और बिस्तर की कमी के बीच सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के आसपास दलाल सक्रिय हो गए है। बुधवार को कटनी से आए एक कोरोना मरीज उपचार के लिए निजी अस्पताल के चक्कर काटता रहा। भर्ती नहीं करने पर रात में मेडिकल अस्पताल पहुंचा। जहां एक दलाल मिला उसने भर्ती कराने के लिए एक दलाल ने परिजनों से 15 हजार रुपए ले लिए।

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