आखिर पुलिस ऐसा क्या कर रही है जिससे बैंक प्रबंधनों में मची है खलबली, जानें विस्तार से

-पकड़े गए जालसाज, खबलबली बैंक प्रबंधन में

By: Ajay Chaturvedi

Published: 23 Aug 2021, 11:46 AM IST

जबलपुर. जिले में संचालित बैंको के प्रबंधन में इन दिनों खलबली मची है। हालांकि इसका कोई सीधा कारण नहीं है, बस इतना ही है कि पुलिस ने कुछ जालसाजों को पकड़ा है जिन्हें रिमांड पर ले कर सख्ती से पूछताछ की जा रही है। पुलिस की यह गतिविधि ही इन दिनों में बैंक प्रबंधन के लिए बेचैनी भरा है।

बता दें कि जिले में अक्सर यह सुनने को मिलता रहा कि किसी के खाते से मोटी रकम निकाला ली गई। कई दफा तो ऐसा भी हुआ कि किसी ने एटीएम कार्ड तक जारी नहीं कराया है बावजूद इसके एटीएम से रुपये निकाल लिए गए। ऐसे जालसाजी के ऐसे मामलों में कई बार बैंक प्रबंधन पर मिलीभगत का आरोप भी लगा। यहां तक कहा गया कि बैंककर्मियों से सांठगांठ करके ही रुपये निकाले जा रहे हैं। बात तो तब ज्यादा गंभीर हो गई जब कुछ दिवंगतों के नाम से पेंशन की रकम निकाल ली गई।

ऐसे ही कुछ जालसाज पुलिस की गिरफ्त में आए तो पुलिस ने कोर्ट से उन्हें रिमांड पर ले लिया। अब ऐसे तीन जालसाजों से 25 अगस्त तक गहन पूछताछ की जानी है। इससे कतिपय बैंक प्रबंधन भी सकते हैं कि कहीं ऐसा न हो कि जालसाज बैंकों और बैंककर्मियों का नाम न उजागर कर दें। ये खलबली इसीलिए बताई जा रही है।

इस बीच गिरफ्तार तीन जालसाजों से हुई पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि ये जालसाज अब तक 14 मृत पेंशनर्स के नाम पर पेंशन व लोन की राशि हड़पना स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में पुलिस को विश्वास है कि इन तीनों जालसाजों से कड़ी पूछताछ में जालसाजी के कई मामलों का खुलासा हो जाएगा।

गिरोह के सदस्यों ने स्वीकार किया है कि बैंक के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की साठगांठ से वे जालसाजी की घटनाओं को अंजाम देते रहे। गिरोह के सदस्य 2018 से फर्जीवाड़ा में जुटे हैं। इस तरह की और कितनी घटनाओं को गिरोह अंजाम दिया जा चुका है, इसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संबंधित बैंकों के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका का पता लगा कर उनकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इधर, रिमांड स्वीकृत होने के बाद ठगों से चली पूछताछ में करीब 40 घटनाओं के खुलासे की संभावना जताई गई है।

रांझी थाना प्रभारी आरके मालवीय की मानें तो साफ्टवेयर इंजीनियर योगेंद्र शर्मा ने ठगों के खिलाफ शिकायत की थी। योगेंद्र की नानी गायत्री बाई शर्मा शासकीय विद्यालय में शिक्षक थीं, 2004 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन मिलती थी। 2018 में वे बीमार होकर निजी अस्पताल में भर्ती थीं। उपचार में होने वाले खर्च की व्यवस्था करने के लिए योगेंद्र ने जालसाज सुशील वाघमारे से संपर्क किया। पेंशन खाते पर ढाई लाख रुपये लोन स्वीकृत कराने के लिए उसने नानी के पहचान संबंधी तमाम दस्तावेज तथा 30 हजार रुपये वाघमारे को दिए थे। कुछ दिन बाद गायत्री शर्मा की मौत हो गई। उसके बाद योगेंद्र ने वाघमारे से संपर्क किया तो उसने बताया कि नानी की मौत के बाद लोन की प्रक्रिया बंद कर दी गई है।

योगेंद्र निश्चिंत हो गया लेकिन कुछ दिनों पूर्व उसे पता चला कि मृत नानी के नाम पर बैंक से हर महीने 22 हजार रुपये पेंशन निकाली जा रही है तथा ढाई लाख का लोन भी स्वीकृत कराया गया है। योगेंद्र ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की। धोखाधड़ी की एफआइआर दर्ज कर पुलिस ने प्रकरण में तीन आरोपियों चीपुरम कालोनी मड़ई रांझी निवासी सुशील वाघमारे (35 वर्ष), इंद्रा नगर भूमिया मोहल्ला रांझी निवासी जीवन सिंह ठाकुर (39 वर्ष) और महाराजपुर अधारताल निवासी राजकुमार नामदेव (58 वर्ष) को गिरफ्तार किया था। मृत पेंशनर्स के नाम पर बैंक से पेंशन व लोन स्वीकृत करवाकर वे सरकारी धन हजम कर रहे थे।

अब मृतकों के नाम पर पेंशन व लोन स्वीकृत करने वाली बैंक की शाखाओं में खलबली मची है। बैंकों के रिकार्ड व सीसीटीवी फुटेज देखे जा रहे हैं। मिलते-जुलते चेहरे वाले वृद्धजन को भी तलाशा जा रहा है जिन्हें बैंक अधिकारियों के समक्ष पेश कर मृत पेंशनर्स के नाम पर पेंशन व लोन की रकम जारी कराई गई थी। पुलिस की पूछताछ में बच्चूलाल, श्यामा बाई, चंदा बाई, सुशीला बाई, हरि सिंह, भागवती, गोविंद ढीमर, कोसा बाई, गायत्री बाई, बरी बाई, शीला चौधरी, रामदयाल, देव दयाल, गुलाबचंद, राधाबाई के नाम से 2018 से पेंशन की रकम निकालने के प्रमाण पुलिस को मिल चुके हैं।

दरअसल जालसाज गिरोह के सदस्य फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए मृत पेंशनर्स के हू-ब-हू फर्जी हस्ताक्षर करते थे। उनके अंगूठे के निशान भी उन्होंने प्राप्त कर लिए थे। पुलिस के अनुसार बैंक के कर्मचारियों से मिलीभगत कर जालसाज मृत पेंशनर्स के हस्ताक्षर व अंगूठे के नमूने की मोबाइल पर फोटो खींच लेते थे, जिसके बाद हूबहू हस्ताक्षर कर या अंगूठे का निशान बनाकर बैंक से पेंशन व लोन हासिल करने का फर्जीवाड़ा करते थे। पेंशन की रकम निकालने के लिए कुछ मृत पेंशनर्स के परिजनों की भी संदिग्ध भूमिका का भी पता चला है। जालसाज परिजनों को भी पेंशन की रकम का कुछ हिस्सा देते रहे। हर माह तकरीबन एक हजार रुपये उन लोगों को दिए जाते थे जिनके मिलते-जुलते चेहरे का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया जाता था।

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