कम उम्र में हो रही बड़ी बीमारी, रिस्क जोन में 20-45 साल वाले

एंटी रेट्रोवायरल सेंटर में तीन गुना हो गए मरीज

जबलपुर। मध्यप्रदेश के महाकोशल अंचल में एचआइवी एड्स पीडि़तों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जबलपुर शहर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल सेंटर (एआरटी) की शुरुआत के समय औसतन प्रतिमाह पांच सौ से कम एचआइवी पॉजीटिव आते थे। अब यह संख्या तीन गुना हो गई है। औसतन प्रतिमाह डेढ़ हजार से ज्यादा एचआइवी पीडि़त उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। एचआइवी एड्स पीडि़तों में ज्यादा संख्या युवाओं की है। एआरटी सेंटर के अधिकारियों के अनुसार 20-45 आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा एचआइवी पॉजीटिव मिले हैं। इसकी बड़ी वजह असुरक्षित यौन संबंध है।
नवजात खतरे में
एचआइवी एड्स पीडि़त नवजात की मौत का खतरा ज्यादा होता है। पहले पचास प्रतिशत एचआइवी पॉजीटिव बच्चों की जन्म से दो वर्ष के अंदर मौत हो जाती थी। जांच और दवा शुरू करने की लंबी प्रक्रिया थी। लेकिन जांच और उपचार की बदली व्यवस्था से बच्चों का जीवनकाल बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अब बच्चे का ब्लड ड्राय स्पॉट (डीबीएस) टेस्ट कराया जाता है। रिपोर्ट पॉजीटिव होने पर दूसरा टेस्ट होता है। दोबारा पॉजीटिव आया तो तुरंत उपचार शुरू कर दिया जाता है। जल्दी उपचार मिलने से एचआइवी पॉजीटिव बच्चों की सेहत में सुधार हुआ है। एनएससीबीएमसी के एआरटी सेंटर में 545 एचआइवी पॉजीटिव बच्चे है। इसमें 225 बच्चों का अभी उपचार जारी है।
संक्रमण के कारण
- असुरक्षित यौन संबंध
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन
- एक ही सिरिंज का इस्तेमाल
- गांवों में गुदना में एक निडिल का प्रयोग
- नशे की दवा लेने के दौरान
- टीबी, नवजात को गर्भवती के संक्रमित होने पर
2006 में एआरटी सेंटर शुरू
- 20-25 मरीज पहले प्रतिदिन ओपीडी
- 70 से ज्यादा हो गई है अब ओपीडी
- 130 तक मरीज मंगलवार के दिन आते हैं
अवधि - नए पीडि़त
2016-17 : 556
2017-18 : 641
2018-19 : 457
2019-20 : 488 (31 अक्टूबर, 2019 तक)
(नोट: एनएससीबीएमसी एआरटी सेंटर में पंजीकृत मरीज)

एआरटी सेंटर
- 8116 पंजीकृत पीडि़त है
- 6247 पीडि़त उपचार पर
- 15 ट्रांसजेंडर पंजीकृत

एआरटी सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक वरकड़े ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता और जागरुकता की कमी है। समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठनों को जमीन पर और बेहतर तरीके से कार्य करना होगा। जबकि, एआरटी सेंटर के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. नमिता पाराशर ने बताया कि देश में कुल एचआइवी पीडि़त के 2 प्रतिशत ही मप्र में है। एनजीओ की मदद से स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन अभी भी एचआइवी पॉजीटिव ज्यादा केस ग्रामीण क्षेत्रों के है। 20-45 वर्ष के लोगों की संख्या भी अधिक है।

shyam bihari
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